उत्तर अमेरिका, ग्रेट लेक्स फा सम्मेलन में फा की सीख
 

ली होंगज़ी
दिसम्बर 9, 2000 ~ एन आर्बर, अमेरिका

आप कड़ा परिश्रम कर रहे हैं! (उत्साह से तालियाँ)

मैं आपको देखकर बहुत प्रसन्न हूं। आप एक वर्ष पहले ऐसे नहीं थे। इतनी कड़ी परीक्षा से गुज़रने के बाद, मैं बता सकता हूँ—हालाँकि हो सकता है कि आपको इसका अधिक एहसास न हो—कि आप पहले से पूरी तरह से भिन्न व्यक्ति बन गए हैं। हम सभी सबसे गंभीर परीक्षा से गुज़रे हैं, कुछ ऐसा जो इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ था, और यह एक क्रूर परीक्षा थी। अतीत में, आप जो कुछ भी करते थे उसमें आपकी मानसिकता यह थी: "मैं कैसे फा का अच्छी तरह से अध्ययन कर सकता हूँ? मुझे दाफा के लिए कैसे काम करना चाहिए? मैं स्वयं को कैसे सुधार सकता हूँ? मैं कैसे बेहतर कर सकता हूं?" आपने हमेशा अनुभव किया कि आप दाफा सीख रहे थे, यह नहीं कि आप दाफा के एक भाग थे। इस वर्ष के बाद मैंने पाया कि आप पूरी तरह से परिवर्तित हो गए हैं। अब आप पहले की तरह नहीं सोचते। चाहे आप दाफा के लिए जो भी करते हैं और चाहे आप जो भी कर रहे हैं, आप "मैं दाफा के लिए कुछ करना चाहता हूं" या "मैं इस तरह से या उस तरह से सुधार करना चाहता हूं" के बारे में सोचने के स्थान पर स्वयं को दाफा के साथ आत्मसात कर रहे हैं, जैसे कि आप पहले किया करते थे। चाहे आप जो भी करते हैं, आप यह नहीं सोच रहे हैं कि आप दाफा के लिए कुछ कर रहे हैं, यह कि आपको दाफा के लिए चीजें कैसे करनी चाहिए, या "मैं इस फा के लिए चीजों को कैसे अच्छी प्रकार से कर सकता हूं।" इसके स्थान पर, आप स्वयं को दाफा का अंश समझ रहे हैं। दाफा के एक कण की तरह, [आपको लगता है कि] चाहे जो भी हो, आपको केवल इसे करना चाहिए। भले ही आप इसके बारे में सचेत नहीं हैं या इसे शब्दों में स्पष्ट रूप से व्यक्त नहीं कर रहे हैं, वास्तव में आपके कार्य अब ऐसे ही हैं। इस वर्ष के बाद यह सबसे बड़ा परिवर्तन है जो मैं आप में देख रहा हूं। दूसरे शब्दों में, आप अब पूरी तरह से फा में हैं। यह विशेष रूप से अनुभवी शिष्यों के आचरण में सबसे अधिक स्पष्ट है। इससे पहले यह कहा जा सकता था कि आप एक शिष्य थे। अब, मैं अक्सर "शिष्यों" के स्थान पर "शिष्यों" का उपयोग करता हूँ। आप वास्तव में बहुत बड़े परिवर्तनों से गुजरे हैं। क्योंकि आप साधक हैं, गुरु ने प्रोत्साहित करते हुए आपकी अधिक प्रशंसा नहीं की है जैसा कि साधारण लोग करते हैं और ना ही आपको बताया कि आप कितना अच्छा कर रहे हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि आप साधक हैं और आपको पता होना चाहिए कि क्या करना है।

आज जो चीजें घटित हो रही हैं वे इतिहास में बहुत पहले व्यवस्थित की गई थीं। किसी भी समय कुछ भी अनुचित नहीं हुआ है। निःसंदेह, यह व्यवस्था प्राचीन ब्रह्मांड में उन उच्च स्तरीय प्राणियों द्वारा की गई थी। इसके अतिरिक्त, इसे ब्रह्मांड की परत दर परत में प्राचीन प्राणियों द्वारा क्रमानुसार व्यवस्थित किया गया था। उनका लक्ष्य इस ब्रह्मांड को बचाना था। वे सोचते हैं कि उन्होंने इन चीजों को अच्छी तरह से करने में अपना पूरा प्रयास किया है और इस विषय को एक अच्छे निष्कर्ष पर ले आए हैं—जिसमें वर्तमान का दाफा और यहां तक कि दाफा के शिष्य भी सम्मिलित हैं। वे यही सोचते हैं। आपको स्मरण होगा कि पिछली बार मैंने क्या कहा था जब मैंने सैन फ्रांसिस्को में फा को सिखाया था—कि कोई भी ब्रह्मांड के महान फा की परीक्षा लेने के योग्य नहीं है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इस ब्रह्मांड में किसी भी प्राणी का आयाम और स्तर कितना भी ऊंचा क्यों न हो, वह अभी भी इस ब्रह्मांड के भीतर एक प्राणी है, और फा द्वारा सृजित किया गया था। दूसरे शब्दों में, उसका अस्तित्व भी इस फा द्वारा बनाया गया था, तो वह कैसे पलट कर इस फा की परीक्षा ले सकता है? हालाँकि, जैसा कि मैंने आपको पिछले फा-व्याख्यानों में भी कई बार बताया है, अतीत के प्राणी ब्रह्मांड के फा के बारे में नहीं जान सकते थे—और उन्हें जानने की अनुमति नहीं थी। निःसंदेह, इसे साधारण मानवीय शब्दों में कहा जाये तो, उदाहरण के लिए, यदि ब्रह्मांड के चेतन प्राणियों को पता चल जाता कि ब्रह्मांड में फा है, तो युगों के दौरान ब्रह्मांड के चेतन प्राणियों के फा से भटक जाने के बाद यह कई और समस्याओं को लेकर आता। कुछ प्राणी इस फा को बदलने का प्रयास कर सकते हैं। क्योंकि उनके पास क्षमता है, वे लगभग कुछ भी कर सकते हैं। यही कारण है कि जिस रूप में ब्रह्मांड के महान फा का अस्तित्व है उसे किसी भी स्तर के प्राणियों द्वारा जानने की अनुमति नहीं है। इसके कारण एक समस्या उत्पन्न हुई है। वे नहीं जानते कि इस ब्रह्मांड में कोई फा है। वे ब्रह्मांड के महान फा की इस ब्रह्मांड में व्यापक रूप से फैलने की क्षमता को मेरे इस फा से ज्ञानप्राप्ति होने का परिणाम मानते हैं। और उन्होंने वास्तव में इस विषय की सफलता के लिए और इन सभी चीजों को अच्छी तरह से करने में मेरी सहायता करने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ दिया है। लेकिन इससे एक और समस्या उत्पन्न होती है। कौन सी समस्या? ब्रह्मांड के सभी प्राणी इस फा से भटक गए हैं। दूसरे शब्दों में, उनके स्तर और शुद्धता, जब ब्रह्मांड के मूल महान फा के आदर्श से मापे जाते हैं, अब पर्याप्त नहीं हैं। इसलिए इस विषय में उनकी सभी व्यवस्थाएं और सहायता मेरे इस उपक्रम को पूरा करने में सबसे बड़ी बाधा बन गई हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि चाहे वे कितना भी अच्छा कर लें, यह उनके स्तर से बढ़कर नहीं होगा। यदि चीजें उनके द्वारा व्यवस्थित की गई सब चीजों के अनुसार की जाती हैं, तो इसके बारे में सोचें: क्या यह वैसे ही नहीं होगा जैसे इसके पूर्ण किये जाने पर भी कुछ भी नहीं किया गया है? यह कैसे स्वीकार्य हो सकता है यदि इसके पूर्ण होने के बाद भी वही स्तर और आदर्श बने रहें? इसलिए ये सभी चीजें जो उन्होंने व्यवस्थित करके की हैं, उन्हें स्वीकार्य या मान्य नहीं माना जा सकता है।

इससे तब एक गंभीर समस्या उत्पन्न हुई। न केवल ये सभी चीज़ें जिनकी उन्होंने व्यवस्था की थी, फा-सुधार में कोई सकारात्मक भूमिका नहीं निभा सकतीं: वे एक गंभीर बाधा भी बन गईं। साधारण मानव समाज में यह दुष्ट नाटक आज उसी का भाग है जिसे उच्च-स्तर के प्राणियों ने व्यवस्थित किया था। साथ ही, यह उनके शिनशिंग का सबसे बड़ा प्रदर्शन है जो फा की आवश्यकताओं को पूरा नहीं करता है, और यह शिनशिंग और प्राणियों के विभिन्न स्तरों के प्रतिभागियों के आदर्शों को पूरी तरह से दर्शाता है। साथ ही, यह फा-सुधार के लिए अनुकूल परिस्थिति भी उत्पन्न करता है। कौनसी परिस्थिति? यदि फा-सुधार के दौरान कोई भी प्राणी स्वयं को वैसा नहीं दर्शाता जैसा वह है, तो उन्हें उनके विभिन्न शिनशिंग स्तरों के अनुसार स्थापित करना कठिन होता। अर्थात्, यह फा-सुधार को अत्यधिक कठिन बना देता। तो, दूसरे शब्दों में, वे सभी चीज़ें जो उन्होंने दाफा की परीक्षा के लिए की हैं वे एक प्रदर्शन बन गए हैं जिसमें उनके शिनशिंग की स्थिति पूरी तरह से प्रदर्शित और देखी जा सकती है। साथ ही, ऐसा होता है कि शिष्यों में बुरे तत्व होते हैं जो उनके अस्तित्व के लंबे समय के दौरान संचित हुए हैं, साथ ही निम्न-स्तर के आयामों में उत्पन्न कर्म भी होते हैं। इन सभी को समाप्त करने की आवश्यकता है, और इसलिए इस विषय में शिष्यों की कठोर परीक्षा हुई है, और दाफा में शिष्यों के दृढ़ संकल्प की परीक्षा करने के लिए मेरे विरुद्ध झूठ गढ़ने के लिए दुष्ट लोगों का उपयोग किया गया। यह ऐसा ही है।

जैसा कि मैंने अभी उल्लेख किया है, मैं इनमें से किसी को भी स्वीकार नहीं कर सकता। इसलिए मुझे उन्हें नष्ट करने की आवश्यकता है, जिसमें यह दुष्ट नाटक भी सम्मिलित है। पहले वे हमारे साथ वैसा ही व्यवहार करना चाहते थे जैसा अतीत में धर्मों के साथ किया जाता था। उनकी विकृत धारणाओं ने उन्हें यह सोचने पर विवश कर दिया है कि इतिहास में देवताओं का दमन उचित था। यीशु को सूली पर चढ़ाने जैसी घटनाएँ उच्च-स्तरीय प्राणियों के लिए प्रमाण बन गई हैं जो लोगों को बचाने के लिए नीचे आते हैं। यह कैसे स्वीकार्य हो सकता है? वह सोच ही पतित है! एक देवता लोगों को बचाने के लिए नीचे आता है, लेकिन मनुष्य उसे सूली पर चढ़ा देते हैं—उन्होंने कितना बड़ा पाप किया है! इसका परिणाम वे आज भी भुगत रहे हैं। लेकिन यह केवल मानवजाति द्वारा नहीं किया गया था। यह उच्च स्तरों पर प्राणियों के पतन के कारण हुआ था। वे इन सभी विषयों में उनकी ओर से हुए किसी दोष को स्वीकार करने का साहस नहीं करते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि सब कुछ विकृत होता जा रहा है—इतना विकृत कि वे फा से भटक गए हैं और धीरे-धीरे जैसे अभी हैं वैसे ही हो जाते हैं। किसी भी स्तर पर किसी भी प्राणी ने कभी उन्हें छूने का साहस नहीं किया। सब कुछ परस्पर जुड़े तत्वों द्वारा निर्धारित किया जाता है जो बेहद जटिल हो गए हैं। इन सभी अशुद्ध चीजों को नष्ट कर देना होगा—पूरी तरह से नष्ट कर देना होगा!

भले ही यह दुष्ट नाटक साधारण मानव समाज में प्रकट होता है और ऐसा प्रतीत होता है कि दुष्ट मनुष्यों ने मेरे दाफा शिष्यों के लिए इस गंभीर कष्ट का निर्माण किया है, यह वास्तव में विभिन्न स्तरों से विकृत प्राणियों की भागीदारी के कारण हुआ है—मैं उन पतित प्राणियों की बात कर रहा हूँ। जिन प्राणियों ने भाग नहीं लिया वे अधिक प्रमाण में हैं। लेकिन वे भी अब पवित्र नहीं रहे हैं, और वे सभी फा-सुधार के दौरान पुनर्स्थापित किए जा रहे हैं। एक और बहुत गंभीर समस्या है। जब मैंने यह उपक्रम शुरू किया था तब मैंने उनसे कहा था कि कोई भी प्राणी वर्तमान के लोगों को नहीं बचा सकता है, यह कि, कोई फा वर्तमान के प्राणियों को नहीं बचा सकता है, और यह कि, कोई भी वर्तमान के लोगों को परिवर्तित नहीं कर सकता है। मेरा यह कहने का क्या अर्थ है? मैं आपको बताता हूं। वर्तमान के लोग अपनी विकृत सोच को अनुभव नहीं कर सकते क्योंकि लोगों की प्रकृति ही परिवर्तित हो गई है। चाहे साधना का कोई भी मार्ग अपनाया जाये, आप केवल वही परिवर्तित कर सकते हैं जिसके बारे में वे जागरूक हो सकते हैं, लेकिन उसे नहीं जो उनकी प्रकृति में ही विकृत है। इसलिए इस एक वर्ष से अधिक के गुजरने के बाद भी, उन्होंने चाहे जो भी तरीके अपनाए हों और चाहे वे कितने भी क्रूर क्यों न हों, वे शिष्यों की मूलभूत समस्याओं को हल करने में असमर्थ रहे और अंत में अपने लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर पाए। शिष्यों को उनके आदर्शों तक पहुँचाने के लिए—उनकी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए—उन्होंने शिष्यों को निर्दयता से पीटने के लिए उन दुष्ट प्राणियों का उपयोग किया। जब उनके सभी क्रूर साधन समाप्त हो गए और अभी भी अपने लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सके, तो वे व्याकुल हो गए और उत्तेजित हो गए, और हमारे शिष्यों के विरुद्ध और भी अधिक क्रूरता करने लगे। अंत में, भले ही वे अपने लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सके, उन्होंने कहा कि उन्होंने अपना पूरा प्रयास किया था। कितनी दुष्टता! फिर भी विशाल ब्रह्मांड के परत दर परत प्राणी इन सभी दुष्टों की दुष्टता को नहीं समझ सकते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि सभी प्राणी पतित होते जा रहे हैं।

उनके अपने लक्ष्य को प्राप्त नहीं करने का अर्थ यह नहीं है कि हमारे शिष्य अब वहां नहीं पहुँच सकते हैं। फा-सुधार के दौरान सभी को मानक तक पहुँचाया जा सकता है। मैंने उन्हें बहुत पहले ही कह दिया था कि ऐसा नहीं करो। केवल मानवजाति ही नहीं, किसी भी प्राणी के लिए, चाहे वह कितना भी उच्च क्यों न हो, जब तक वह ब्रह्मांड के भीतर एक प्राणी है, मैं उसे फा-सुधार के दौरान, उसके मूल स्वभाव से, उसके अस्तित्व के मूल से, सुधार सकता हूँ, और उन सभी तत्वों से जो उसके अस्तित्व का निर्माण करते हैं, अशुद्धि को हटाकर उन चीजों को परिवर्तित कर सकता हूँ। मैंने उनसे कहा कि ऐसा नहीं करो। उन्होंने नहीं सुना, जबकि मैंने ही उन्हें फा सिखाया था, क्योंकि उन्होनें पुरे सत्य पर विश्वास नहीं किया। क्योंकि उन्होंने ऐसा किया है, इसलिए यह उनका पाप है। वे अब तक अभी भी इसी प्रकार सोच रहे हैं: “हमने आपकी सहायता करने के लिए अपनी क्षमता के अनुसार सब कुछ किया है। क्योंकि यह इतना विशाल फा है और इसमें भविष्य के ब्रह्मांड की सुरक्षा सम्मिलित है, यह अस्वीकार्य है यदि आपके शिष्य आदर्शों पर खरे नहीं उतरते हैं। यदि इतना विशाल फा इतनी बड़ी परीक्षा से न गुजरे तो यह नहीं चलेगा।" वे यही सोच रहे हैं। इसलिए वे आवश्यक आदर्शों को पूरा न करने के स्थान पर सब कुछ नष्ट कर देना उचित समझते हैं। इसलिए यह परीक्षा जिसका दाफा शिष्यों को सामना करना पड़ रहा है, इतिहास में कभी ऐसा नहीं देखा गया। जैसे कि आप जानते हैं, इतिहास में ऐसे आधुनिक जनसंचार माध्यम कब अस्तित्व में थे? वे सब जगह हैं। क्या परिवहन के ऐसे आधुनिक साधन कभी अस्तित्व में थे? उन्होंने विश्व के क्षेत्र को काफी छोटा कर दिया है। तो यह इतिहास में एक अभूतपूर्व, सबसे गंभीर दमन रहा है। लेकिन दुष्टता के होते हुए, शिष्यों द्वारा किया गया सब कुछ फा-सुधार और गुरु के लिए सबसे अच्छा है, क्योंकि आपने वास्तव में इस दुष्ट नाटक का प्रतिरोध किया है। और फिर, वे ब्रह्मांड में सबसे पतित प्राणियों का पूरी तरह से उपयोग करके ये सब कार्य कर रहे हैं। ब्रह्मांड में सभी प्राणी स्वयं को पुनःस्थापित कर रहे हैं। मनुष्य इस फा की परीक्षा लेने के योग्य नहीं हैं, और न ही देवता हैं। जो कोई ऐसा करता है वह पाप करता है। यह सब उन्होंने भी अनुभव किया है।

तो क्या यह सच है कि यदि उनकी ये सारी व्यवस्थाएं नहीं मानी गईं तो जिन शिष्यों ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया है, वे भी फल पदवी की ओर अग्रसर होंगे? नहीं, ऐसा नहीं है। यदि ऐसा नहीं हुआ होता, तो मैं सभी जीवों को करुणामयी समाधान दे सकता था और उन्हें फल पदवी के मानक को पूरा करने में सक्षम बना सकता था। परन्तु यह दुष्टता-जनित कष्ट घटित हुआ है। अधिकांश शिष्यों ने विभिन्न तरीकों से दाफा को प्रमाणित करने, सत्य को स्पष्ट करने और विश्व के लोगों को बचाने के लिए आगे बढ़े हैं। उनमें से कुछ बंदी बना लिए गए हैं, पीटे गए हैं, या दमन से मर गए हैं; यहां तक कि गुरु पर भी झूठ के विषैले वार किये जा रहे हैं। जानलेवा परीक्षाओं के सम्मुख, शिष्यों ने आगे बढ़ने का साहस दिखाया है—सब कुछ संकट में डालते हुए आगे बढ़ना—और वह सब कुछ करना जो भव्य है, जो एक दाफा शिष्य को करना चाहिए। दूसरी ओर, जो लोग आगे नहीं आये हैं, उन्होंने स्वयं को छिपा लिया है, और दुष्ट जीवों की समझ को अपना लिया है—वे अब भी दाफा शिष्य कैसे हो सकते हैं? क्या वे लोग अभी भी दाफा के शिष्य हैं जिनकी धारणाएँ उस दुष्टता का पक्ष लेती हैं जो दाफा पर दमन करते हैं और जो बुरे कार्य कर रहे हैं? क्या उनके पास अन्य लोगों की तरह फल पदवी के लिए आवश्यक महान सद्गुण हैं? और फिर, देवता मनुष्यों की तरह नहीं होते हैं। उदाहरण के लिए, कुछ शिष्यों को बंदी बना कर जेल भेज दिया गया। जब वे घोर यातना सहन नहीं कर सके, तो उन्होंने पश्चाताप के पत्र लिखे। लेकिन वे अपने मन में सोच रहे थे: “यह उन्हें मूर्ख बनाने के लिए है। मैं बाहर निकलने के बाद अभी भी अभ्यास करूंगा। मैं अभी भी फा का सत्यापन करने के लिए बाहर जाऊंगा और मैं अभी भी तियाननमेन जाऊंगा।" लेकिन यह अस्वीकार्य है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इस प्रकार की धारणा मनुष्य के पतित हो जाने के बाद मानव संसार में विकसित हुई है। लेकिन देवता ऐसे नहीं हैं। उनके इस तरह के विचार नहीं होते हैं। एक बार जब वे एक निश्चित मार्ग को निर्धारित कर लेते हैं, वे निश्चित रूप से उस पर टिके रहेंगे।

बहुत सी बातों को मानव भाषा में समझाना कठिन है। यह वैसा ही है जैसा कई शिष्य मुझसे पूछते हैं: "गुरुजी, इसे शीघ्र ही समाप्त क्यों नहीं किया जा रहा है?" बहुत से लोग पीड़ा के बीच इस तरह से सोचते हैं: “आइए हम शीघ्र ही फल पदवी पर पहुंचें; चलो इसे शीघ्रता से समाप्त करते हैं। वास्तव में, ये सभी मोहभाव हैं। जैसा कि मैंने अभी कहा, वे इस तरह से शिष्यों को परखने के अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में सक्षम थे क्योंकि शिष्यों को स्वयं को सुधारने और अपने कर्म के अंतिम भाग को समाप्त करने की आवश्यकता है। इसकी अनुमति कैसे दी जा सकती है यदि किसी जीव के सतह की ओर प्रगति करने और धीरे-धीरे दिव्य बनने के दौरान, वह स्वयं अपने त्याग नहीं करता है, स्वयं को सुधारना जारी नहीं रखता है, और अपने स्वयं के महान सद्गुण को स्थापित नहीं करता है? इन सब में, मैं दूसरी ओर उन जीवों के शिनशिंग के प्रदर्शन का उपयोग कर रहा हूं जिससे शिष्यों को उसी समय उनके महान सद्गुण को स्थापित करने का अवसर मिल सके। वास्तव में, चाहे कुछ भी हो... साधारण मानव समाज में एक जीव जितना भी कष्ट सहता है, मैं आपको बता दूं कि यह फल पदवी तक पहुंचने के बाद उसकी प्राप्ति की स्थिति के अनुपात में नहीं होगा। यह वास्तव में अनुपात में नहीं है! आप सभी इसके बारे में सोचें: अतीत में, एक व्यक्ति को जीवन भर साधना करनी पड़ती थी या कई जन्मों तक, फिर भी आज हम लोगों को कुछ ही वर्षों में फल पदवी तक पहुँचा रहे हैं। सहन करने की प्रक्रिया केवल एक संक्षिप्त क्षण है, और फिर, समय को भी तेज कर दिया गया है। भविष्य में जब आप पीछे मुड़कर देखेंगे—यदि आप फल पदवी तक पहुँच सकते हैं, अर्थात्—तो आप पाएंगे कि वह कुछ भी नहीं था और केवल एक सपने जैसा था।

लेकिन इस प्रक्रिया के दौरान हमारे शिष्यों ने जो कुछ भी किया है वह वास्तव में उत्कृष्ट है। आपके बारे में सबसे असाधारण बात यह है कि आप फा-सुधार के साथ चलने में सक्षम हैं। जैसा कि मैंने एक क्षण पहले कहा था, साधारण मानव समाज में दुष्टता का यह प्रदर्शन ब्रह्मांड में सबसे पतित जीवों द्वारा किया गया है, ऐसे जीव जिन्हें साधारण मानव समाज में रखा गया है। उनका उपयोग करने के लिए उन्हें तीन लोकों में घुसने दिया गया था। वे उच्च-स्तरीय प्राणी व्यक्तिगत रूप से ऐसे बुरे कार्य नहीं करते जो साधारण मनुष्य करते हैं। वे इन कार्यों को करने के लिए नीचे के दुष्ट जीवों और दुष्ट मनुष्यों का उपयोग करते हैं। इसलिए यह सब बहुत ही बुरा है।

चीन के बाहर हमारे कुछ शिष्य सोचते हैं: “विदेश में होने के कारण, हम चीन के शिष्यों के जितना पीड़ित नहीं हो रहे हैं। क्या इसका अर्थ यह है कि जब हम फल पदवी तक पहुंचेंगे तो हम चीन के शिष्यों जितने अच्छे नहीं होंगे?" ऐसा नहीं होगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि चीन के अंदर और बाहर के शिष्य एक शरीर हैं। जब यह घटना घटित होती है, तो कुछ व्यक्ति ऐसे होते हैं जो यह करते हैं और कुछ जो वह करते हैं। क्योंकि यह फा पर लक्षित एक परीक्षा है, इससे कोई अंतर नहीं पड़ता कि आप कहां हैं या आप क्या कर रहे हैं, आप उन चीजों के बीच में स्वयं का सुधार कर रहे हैं जो आपको करना चाहिए। हर कोई क्या करता है इसके पीछे कारण हैं। फल पदवी के स्तर और फल पदवी की दिशा में प्रगति के संदर्भ में कोई अंतर नहीं है—आप जिस भी स्तर पर फल पदवी तक पहुंचने वाले हैं, आप निश्चित रूप से पहुंचेंगे। यहाँ एक मुद्दा है। मुख्य भूमि चीन में दुष्टता का प्रदर्शन बहुत दुष्टतापूर्ण है। विदेशों में हमारे शिष्यों द्वारा सच्चाई को उजागर किए बिना और चीन में शिष्यों का समर्थन किए बिना, इसके बारे में सोचें, क्या दुष्टता और भी अधिक बेधड़क और बिना संयम के बुरे कार्य नहीं कर रही होगी? क्या यह ऐसा नहीं है? यही कारण है कि हमारे शिष्यों ने फा का सत्यापन करने में जो कुछ भी किया है, उसने दुष्टता को प्रभावी ढंग से उजागर किया है और दुष्टता को नियंत्रित किया है, और साथ ही मुख्य भूमि चीन में हमारे शिष्यों का समर्थन किया है। जो कुछ भी किया गया है—चाहे वह आपका तियाननमेन जाना हो, आपका अन्य वातावरणों में लोगों को सच्चाई स्पष्ट करना हो, या आपके द्वारा फा का प्रचार करना हो और चीन के बाहर लोगों के लिए दुष्टता के बारे में सच्चाई को उजागर करना हो—यह सब भव्य है, क्योंकि आप एक शरीर हैं। निःसंदेह, कुछ शिष्य चीन और तियाननमेन गए: आप उत्कृष्ट हैं, और गुरु आपको बता रहे हैं कि आप उत्कृष्ट हैं। लेकिन, दूसरे दृष्टिकोण से कहा जाये तो, गुरु आपको बताना चाहेंगे कि विदेशी शिष्यों को मुख्य भूमि चीन जाने का प्रयास नहीं करना चाहिए, क्योंकि दुष्टता को उजागर करने के लिए आपकी आवश्यकता है। बहुत से लोग मुझसे यह पूछते थे, और उन्होंने इसे अपनी प्रश्न पर्चियों में भी लिखा था: "गुरु जी, हम अमेरिका में फा क्यों प्राप्त कर रहे हैं? हम फा को चीन के बाहर क्यों प्राप्त कर रहे हैं?" अब यह आपके लिए स्पष्ट है, है ना? आपके द्वारा यहां इन चीजों को किए बिना, क्या ये चीजें फा-सुधार अवधि के दौरान अधूरी नहीं होंगी? आपको यहाँ पर जो करना है वह बस अच्छी तरह से करना चाहिए। यही कारण है कि आपने फा को चीन के बाहर प्राप्त किया। यदि आप सभी वापस चीन चले जाते, तो फा सुधार करने, दुष्टता को उजागर करने, और मुख्य भूमि चीन में शिष्यों के दमन को कम करने के लिए कौन कार्य कर रहा होता? हमारे शिष्य उत्कृष्ट हैं—वास्तव में उत्कृष्ट! आपने वह करने के लिए अपना पूरा प्रयत्न किया है जो आपको करना चाहिए। चाहे आप चीन में हों या चीन के बाहर, आपका प्रदर्शन एक सा होता है; इस बात में यही अंतर है कि आप आगे बढ़ते हैं या आगे बढ़ने में सक्षम नहीं हैं, और आप फा-सुधार के मुद्दे में अपना मन कितना लगाते हैं। यह केवल इतना है कि वातावरण अलग हैं। जहां तक हमारे कुछ शिष्यों का अत्यधिक कष्ट सहने या यहां तक कि अपने प्राण गंवाने का संबंध है, मैं आपको इन चीजों के बारे में बाद में बताऊंगा। जब इसकी सच्चाई का पता चलेगा तो आपको एहसास होगा, "ओह, तो यह ऐसा था।" जैसा कि मैंने अभी कहा—हर चीज के लिए एक व्यवस्था की गयी है।

आपने विश्व के लोगों को सच्चाई स्पष्ट करने में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है। साथ ही, मैं आपको बता दूँ कि यह भव्य और करुणामयी भी है। ऐसा लगता है कि हम एक साधारण व्यक्ति को एक पर्चा दे रहे हैं, और ऐसा प्रतीत होता है कि हम साधारण लोगों को बता रहे हैं कि सत्य क्या है। मैं आपको बता दूं, जब यह फा-सुधार का मुद्दा समाप्त हो जाएगा, तो मानव जाति अगले चरण में प्रवेश करेगी, और वे लोग एवं जीव जो अपने मन में ब्रह्मांड के दाफा को अच्छा नहीं समझते हैं, वे पहले हटा दिए जाएंगे। ऐसा इसलिए है क्योंकि ब्रह्मांड में कुछ जीव कितने भी बुरे क्यों न हों, ये और भी बुरे हैं, क्योंकि ये जिसके विरुद्ध हैं वह ब्रह्मांड का मार्ग है। इसलिए जब हम सत्य को स्पष्ट करते हैं, तो हम दाफा के प्रति कुछ लोगों के बुरे विचारों को हटा रहे होते हैं। क्या हमने उन्हें बचाया नहीं है, कम से कम इस विषय में तो? क्योंकि आपके सत्य को स्पष्ट करने की प्रक्रिया में ऐसे लोग हैं जो फा को प्राप्त करते हैं, न केवल उनके पाप समाप्त हो जाते हैं, बल्कि साथ ही साथ आपने उन्हें बचाया भी होगा। क्या यह नहीं दर्शाता है कि आपने कुछ ऐसा किया है जो अधिक करुणामयी है, कुछ और भी बेहतर? अत्यंत कठिन परिस्थितियों में और जब सबसे दुष्ट जीव सबसे अधिक बर्बरतापूर्ण व्यवहार करते हैं, तब भी हम इतने करुणामयी होने में सक्षम होते हैं—यह सबसे भव्य देवताओं का प्रदर्शन है। जब हम अत्यधिक पीड़ा के बीच होते हैं, तब भी हम दूसरों को बचा रहे होते हैं। (तालियाँ) यह अपने आप को राजनीति में सम्मिलित करना नहीं है—साधारण मानवीय मुद्दों में सम्मिलित होना तो दूर की बात है—क्योंकि दुष्टता को उजागर करने के लिए साधारण मानव रूपों का उपयोग करना हमारे लिए अनुचित नहीं है। हम कुछ भी स्वार्थ के लिए नहीं करते, कुछ साधारण लोगों के संगठन के लिए तो कदापि नहीं। यह दाफा का सत्यापन करने के लिए है। दुष्टता को उजागर करने का अर्थ दाफा और हमारे शिष्यों पर होने वाले दमन को रोकना है।

वास्तव में, अतीत में एक साधक इस बारे में कदापि परवाह नहीं करता था कि वे साधारण लोग क्या सोचते थे: "चाहे आप सोचते हैं कि मैं अच्छा हूं या बुरा, यह सब साधारण लोगों की सोच है, और यह एक साधक के लिए मायने नहीं रखता। कौन परवाह करता है कि आप साधारण लोग कैसे हैं? मैं जो साधना करता हूं वह मैं स्वयं हूं।" एक व्यक्ति फल पदवी तक पहुँचने के बाद चला जाएगा, और इस बात की कदापि परवाह नहीं करेगा कि साधारण लोगों के साथ क्या होता है: "जब लोगों ने पाप किए हैं, तो उन्हें उनके लिए भुगतान करना होगा; और जब वे पर्याप्त रूप से अच्छे नहीं रह जाते हैं, तो इतिहास को उन्हें हटाने दें।" अतीत में ऐसा ही था। आज हमारे दाफा शिष्यों द्वारा दिखाई गई करुणा किसी भी जीव द्वारा अपनी साधना में पहले कभी प्राप्त नहीं की गई है। एक दाफा शिष्य—एक सबसे भव्य, करुणामयी जीव—मानव समाज के हर वातावरण में सबसे उत्कृष्ट और सबसे करुणामयी है, और अन्य जीवों के लिए हितकर है। जब आप सत्य को स्पष्ट करते हैं तो क्या आपको ऐसा नहीं होना चाहिए? आप इसे इसी प्रकार कर रहे हैं। यह एक दाफा साधक की करुणा है—कोई साधारण मानवीय गतिविधि नहीं।

दूसरी बात यह है कि आपने मुझे पहले भी परग्रहिओं के बारे में बात करते सुना है। कुछ पत्रकार जो समझ नहीं पाए या जिन्होंने अनुचित मंशा भी पाल रखी थी, उन्होंने इसके समाचार बनाये। मुझे इस बात की परवाह नहीं है कि पत्रकार क्या कहेंगे— मैं केवल वही करता हूँ जो मुझे करना चाहिए। आने वाले समय में लोग समझेंगे। मैं आपको यहाँ बता सकता हूँ, क्योंकि आप दाफा शिष्य हैं, कि वे परग्रही वास्तव में इस पृथ्वी के सच्चे, वास्तविक निवासी हैं। पृथ्वी की इस स्थिति में जीव, किसी भी काल में, सभी उनके जैसे थे। आपने शायद सुना होगा कि बाइबल में, याहवेह ने कहा कि उन्होनें मनुष्य को अपने स्वरूप में बनाया; पीली जाति के लोगों ने यह भी सुना है कि नू वा ने मनुष्य को [अपनी छवि में] बनाया। उन्होंने ऐसा क्यों किया? ऐसा इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ था। उन्होंने मनुष्यों को देवताओं के स्वरूप में क्यों बनाया? मैं आपको बता सकता हूँ कि अतीत में, यदि मनुष्यों को देवताओं की छवियों में बनाया गया होता, तो यह देवताओं का सबसे बड़ा अपमान होता—देवताओं की सबसे बड़ी निन्दा। फिर इस काल में मनुष्यों को देवताओं के रूप में क्यों बनाया गया? ऐसा इसलिए था क्योंकि इतिहास के इस विशेष काल में दाफा का व्यापक रूप से प्रसार होना था, और इस समय के जीवों को इस दाफा को सुनने के योग्य होना था। यहां पशुओं के झुंड द्वारा दाफा को सुनना पूर्णतया वर्जित है। इसलिए देवताओं ने आज के मनुष्य को अपने स्वरूप में बनाया है। (तालियाँ) फिर भी, जब मनुष्य शुरू में बनाए गए थे, वे आप नहीं थे, न ही वे आज की मानवजाति थे। अब, केवल यह मानव त्वचा अभी भी वैसी ही है जैसी पहले थी। उस समय के मनुष्य केवल मनुष्य थे। इसलिए, वे सभी मनुष्य छोटे कणों की एक परत के आयाम में हैं—जिसे लोग पाताल लोक कहते हैं। दूसरे शब्दों में, वे उस आयाम में हैं जो सबसे बड़े कणों की परत के आयाम की तुलना में निम्न है। इस त्वचा की बात की जाये तो, हालांकि यह अभी भी सतह पर मानव त्वचा है, सही अर्थ में यह वास्तव में अब मानव नहीं है। देवता जिस मानव त्वचा का उल्लेख करते हैं, वह मानव त्वचा नहीं है जिसके बारे में मनुष्य बात करते हैं, किन्तु मानव की संपूर्णता, मानव के आंतरिक अंगों सहित सबसे स्थूल कणों की परत से बनी है।

अतीत के मनुष्य पृथ्वी पर पहले से कम हो गए हैं, क्योंकि इनमें से अधिकतर मानव त्वचाओं में उच्च-स्तर के जीवों ने वास कर लिया है। ऐसा इसलिए है क्योंकि उच्च स्तर के जीवों ने देखा है कि यहां दाफा का प्रसार किया जा रहा है और यह जीवों को बचाने का अवसर है, जो सबसे बड़ा आश्वासन है कि उन्हें भविष्यकाल में प्रवेश मिलेगा। फिर भी यह बात भी उन प्राचीन जीवों द्वारा व्यवस्थित की गयी है। उन्होंने इस संसार में आने वाले जीवों को उन लोगों में विभाजित किया जो फा को प्राप्त करेंगे और जो दाफा के लिए समस्याओं का कारण बनेंगे। उन्होंने सोचा कि जो समस्याएं पैदा करेंगे वे भी भविष्य में फल पदवी को प्राप्त करेंगे, क्योंकि यदि वे समस्याएं पैदा नहीं करते हैं, तो जो साधना करते हैं वे फल पदवी तक नहीं पहुंच पाएंगे। लेकिन यहां यह तर्क मेरे लिए काम नहीं करता है। यह ब्रह्मांड में किसी भी अवधि में काम कर सकता है जब कोई भी जीव लोगों को बचाने के लिए आता है, लेकिन फा-सुधार अवधि के दौरान नहीं। (तालियाँ) यह काम क्यों नहीं करेगा? इसके बारे में सोचें: पूरे ब्रह्मांड में सभी जीवों को उनके शिनशिंग के अनुसार पुनर्स्थापित किया जा रहा है। उन दुष्ट जीवों को कहाँ रखा जाना चाहिए जो दाफा का दमन करते हैं? क्या उन्हें उन जीवों के समान स्थान दिया जा सकता है जो फल पदवी प्राप्त कर रहे हैं? क्या उन्हें भव्य देवताओं के साथ रखा जा सकता था? यह बिल्कुल असंभव है।

उन्हें शुरू में इस बात पर विश्वास नहीं हुआ। अब वे इसे स्पष्ट रूप से देख सकते हैं। इसके कारण एक समस्या उत्पन्न हुई है। क्या समस्या? मानवजाति के पचास प्रतिशत लोगों को फा प्राप्त होन चाहिए—अर्थात् कुछ अरब लोग। फिर भी वे इतने भाग्यशाली नहीं हैं—वे फा-सुधार की अवधि के दौरान दाफा शिष्य बनने में सक्षम नहीं हैं। दूसरे शब्दों में, वे मानवजाति के अगले युग में फा का अध्ययन करेंगे और उसे प्राप्त करेंगे। लेकिन उस युग में फा को प्राप्त करना सरल नहीं होगा: हर किसी के पास एक पुस्तक होगी, लेकिन यदि उसका मन थोड़ा भी विचलित हुआ तो वह व्यक्ति फा को प्राप्त करने में सक्षम नहीं होगा। यह अगले युग की बात है। क्योंकि कई प्राणियों ने इस फा-सुधार की वास्तविक स्थिति को समझा है, अनेक जीव, साथ ही साथ अनेक मनुष्य, क्योंकि मनुष्यों के पास भी एक पक्ष है जो सचेत है—अब बुरा कार्य नहीं करना चाहते हैं, और वे भी एक सकारात्मक तरीके से फा को प्राप्त करना चाहते हैं। लगभग बीस से तीस प्रतिशत लोग ऐसे ही हैं। अर्थात्, सत्तर से अस्सी प्रतिशत मानवजाति फा को प्राप्त करेगी—फा को एक सकारात्मक तरीके से प्राप्त करेगी—और फा के लिए समस्याएं उत्पन्न नहीं करेगी। भविष्य के लोग इस प्रकार फा प्राप्त करेंगे। इसलिए बहुत सारे लोग फा प्राप्त करेंगे। निःसंदेह, जैसा कि मैं अभी कर रहा हूं, यदि ऐसे नए शिष्य हैं जो फा प्राप्त करते हैं, तो उनकी फा करने वाले लोगों के अगले समूह का मुख्य आधार, कुलीन वर्ग बनने की बहुत संभावना है। कुछ शिष्यों ने यह भी देखा होगा कि कुछ लोग फा प्राप्त करने के बाद अभ्यास करने के लिए घर वापस चले जाते हैं और वे आना बंद कर देते हैं, और फिर उनका कोई समाचार नहीं होता है। संभवतः बीज बो दिए गए हैं, संभवतः और भी कारण हैं—दोनों ही संभव हैं। तो हर कोई जो कुछ कर रहा है वह भव्य है, उत्कृष्ट है। मानवजाति की स्थिति बहुत जटिल है—आप किसी व्यक्ति की केवल सतह को नहीं देख सकते। वे सभी जो फा-सुधार की अवधि में दुष्टतापूर्ण कार्य करते हैं, उन्हें वह मिलेगा जिसके वे पात्र हैं। यह निश्चित रूप से है, क्योंकि सभी जीव अपने आप को पुनर्स्थापित कर रहे हैं। आप अनुमान लगा सकते हैं कि दाफा को हानि पहुंचाने वाले जीवों को कहां रखा जाएगा। आज के फा-सुधार के दौरान हर चीज के लिए आवश्यकताओं को बिल्कुल कड़ा और बिल्कुल पवित्र होना चाहिए। इस तरह यह अतीत में की गई हर चीज से अलग है।

कुछ विशिष्ट विषयों में, कुछ शिष्यों के मन शुरू में पिछले वर्ष की 25 अप्रैल की घटना से 20 जुलाई की घटनाओं के बीच बहुत दुविधा में थे। यह स्वाभाविक भी है, क्योंकि जब आपके साधारण मानवीय विचार होते हैं तभी आप साधना कर सकते हैं; केवल जब आपके साधारण मानवीय विचार हों, तभी आप दुविधा में पड़ सकते हैं; और केवल जब आपके साधारण मानवीय विचार होते हैं तभी आप उस उचित मार्ग का निर्धारण कर सकते हैं जो आपको दुविधा के बीच लेना चाहिए। यह साधना है। इसलिए उस समय आप में से बहुत से लोग सोच रहे थे: "यह फा जिसका मैं अध्ययन कर रहा हूँ क्या यह उचित और पवित्र है? ली होंगज़ी किस प्रकार के व्यक्ति हैं? क्या इस दुष्ट शक्ति द्वारा कही गई बातों में सच्चाई है जो दूसरों की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाने के लिए झूठ बोलती है?” प्रत्येक शिष्य ने इन प्रश्नों के बारे में सोचा—आपने थोडा बहुत उनके बारे में सोचा था। यह आपको आत्मचिंतन का अवसर प्रदान करने के लिए भी था। इसलिए यह अनुचित नहीं था। आपके शांत होने के बाद, आपने वह मार्ग अपनाया जो आपको अपनाना चाहिए था। किसी व्यक्ति को शब्दों में व्यक्त करने और लोगों को यह बताने की कोई आवश्यकता नहीं है कि वह चीजों को कैसे समझता है—आपके कार्यों ने पहले ही सब कुछ सिद्ध कर दिया है। दाफा में आज इस बिंदु पर पहुँचने में सक्षम होने के कारण, आपके कार्यों ने पहले ही सिद्ध कर दिया है कि आप कौन सा मार्ग चाहते हैं, वह जो एक साधक को अपनाना चाहिए। सभी शिष्य जो पार आने में समर्थ हुए हैं वे भव्य हैं—वे सभी उत्कृष्ट हैं। (तालियाँ)

इस प्रक्रिया के दौरान, शिष्यों को कई विशिष्ट समस्याओं और कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। पहले तो उन्हें पता नहीं था कि उनका निवारण कैसे करना चाहिए। बाद में, वे धीरे-धीरे समझ गए, और परीक्षण और त्रुटि के माध्यम से उन्होंने पता लगाया कि क्या करना है। मैंने कुछ नहीं कहा, विशेषकर उस समय अवधि के दौरान, क्योंकि यदि मैं कुछ कहता तो उस परीक्षा की गिनती नहीं होती। यदि परीक्षा की गिनती नहीं होती, तो दो समस्याएं आतीं। प्राचीन शक्तियां हानि पहुंचाने के लिए अपनी पूरी शक्ति लगा देती। वे इसे एक कुटिल फा के रूप में मानती, और यह मेरे इस फा-सुधार के उपक्रम के लिए बहुत बड़ी समस्याओं का कारण होता और पूरे ब्रह्मांड के लिए बड़ी अव्यवस्था पैदा करता। इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती थी। एक और समस्या यह होती कि क्योंकि उस समय दुष्टता जो बहुत अधिक दबाव डाल रही थी वह बहुत बड़ी थी... Minghui.org पर प्रकाशित किये गए चित्र में, हमने देखा कि पृथ्वी की छवि शैतान के समान है। वह केवल पृथ्वी पर कर्म की अभिव्यक्ति थी। क्योंकि प्रत्येक कर्म-कण की अपनी विशिष्ट कर्म-छवि होती है, सामूहिक रूप से उनकी एक समग्र छवि भी होती है, जो कर्म की छवि होती है। लेकिन उस समय वह दुष्टता इस कर्म से कई गुणा अधिक थी। यह कई स्तरों के जीवों के लिए अत्यधिक भयावह था—पृथ्वी ही एकमात्र ऐसी चीज़ नहीं थी जो दुष्टता से ढकी हुई थी। उन्होंने सोचा कि इतनी कड़ी परीक्षा से गुजरे बिना, इतना विशाल फा स्थापित नहीं किया जा सकता। लेकिन वे यह भी जानते थे कि इतनी बड़ी परीक्षा के दबाव में, मनुष्य इसे सहन नहीं कर पाएंगे और वे नष्ट हो जाएंगे। वे यह भी जानते थे कि दाफा शिष्यों के लिए इस प्रकार की परीक्षा को पार करना बहुत कठिन होगा। फिर भी, उन्होंने सोचा, “तो फिर उन्हें नष्ट होने दिया जाए।” उन्होनें मुझे भी एक साधक ही समझा। उनका मानना था कि इस विशाल फा की ज्ञानप्राप्ति के लिए इतनी बड़ी परीक्षा की आवश्यकता होगी। आप सब इसके बारे में सोचें: इस बारे में बात करना सरल है, लेकिन वास्तव में, यह अत्यधिक भयावह था। उस समय का वातावरण इतना अधिक भयानक था कि वह वर्णन से परे था। लेकिन चीन और विदेशों में हमारे शिष्यों ने उस समय इसे अनुभव किया और इस विश्व में दुष्टता की सीमा को दुष्टों द्वारा अभिव्यक्त करते हुए देखा। सतही तौर पर, यह केवल मनुष्यों के बीच एक अभिव्यक्ति प्रतीत होती थी। संक्षेप में, वे दुष्ट कारक मनुष्यों को प्रभावित कर रहे थे। शुरू से ही मैंने उन्हें नष्ट करने का पूरा प्रयत्न किया, लेकिन वे बहुत विशाल थे। आप उन्हें चाहे कितनी भी तेजी से नष्ट करें, इसके लिए एक प्रक्रिया की आवश्यकता होती है। उन्हें नष्ट करने में मुझे नौ माह जितना समय लग गया। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था... इतना विशाल। उस समय, क्योंकि यह दुष्टता अविश्वसनीय रूप से विशाल थी, इसलिए शिष्यों के लिए इसे सहन करना असंभव होता; और फिर यदि यह सहन नहीं होता, तो उनकी परीक्षा नहीं गिनी जाती। आप इसे ऐसे ही नष्ट नहीं कर सकते, इसलिए आपको इसे सहना होगा। लेकिन मैं जानता था कि यदि शिष्यों को यह सहन करना पड़ा, तो उनके लिए इसे पार कर पाना बहुत कठिन होता। इसलिए मैं शिष्यों को केवल मनुष्यों द्वारा की गई दुष्टता को सहन करने दे सकता था, जबकि मैं वास्तविक चीजों को सहन करता था। (तालियाँ) यह आपको यह बताने के लिए नहीं है कि गुरुजी कितने महान हैं; मेरा अर्थ यह नहीं था। मैं आपको बता रहा हूं कि क्या हो रहा था। इन चीजों के नष्ट हो जाने के बाद स्थिति बदल गई। इस वर्ष मार्च के बाद से स्थिति में धीरे-धीरे बदलाव आया है। उन दुष्ट कारकों द्वारा प्रभावित नहीं होने के कारण, दुष्ट मनुष्यों पर से उनका नियंत्रण हट गया जो उनके मन को सुदृढ़ करता था। वे अब सोचते हैं कि दाफा ने परीक्षा पास कर ली है। ये मुद्दे संपन्न होने की प्रक्रिया में हैं; यह केवल इतना है कि अभी भी लोगों का एक समूह है जो आगे नहीं बढ़ा है।

निःसंदेह, मेरे चुप रहने के और भी कारण थे। एक यह था कि मैं यह भी देखना चाहता था कि मेरे शिष्य—वे शानदार दिव्य जीव जो भविष्य में फल पदवी प्राप्त करेंगे—इस विनाशकारी परीक्षा के बीच कैसे व्यवहार करेंगे। निश्चित रूप से अन्य कारण भी थे। लेकिन कष्टों के बीच आपने जो भी कदम उठाया है, वह आपने स्वयं उठाया है। मैंने एक शब्द भी नहीं कहा। कुल मिलाकर, आप वास्तव में एक पवित्र मार्ग लेने में सक्षम थे। यद्यपि सभी के विचार शत प्रतिशत उचित नहीं रहे हैं, फिर भी आपने जो कुछ भी किया है उसमें जो प्रदर्शित हुआ है वह भव्य है, क्योंकि उस समय गुरुजी आसपास नहीं थे। वे जीव जिन्होंने हमारे लिए यह समस्या पैदा की है—वे प्राचीन जीव—जब इस विषय की बात आती है तो वे सराहना कर रहे हैं, निःशब्द हैं। चाहे वह जो किया जाना चाहिए था या जो सहन किया जाना चाहिए था, आप सम्मान से, उचित रूप से, और उल्लेखनीय रूप से पार आए हैं।

निःसंदेह, भले ही स्थिति में अभी भी सुधार हो रहा है, दुष्टता को अभी तक पूरी तरह से समाप्त नहीं किया गया है और यह अभी भी खेल दिखा रही है। आप सचेत रहना छोड़ नहीं सकते। आपको अभी भी अपने प्रयासों को जारी रखने की आवश्यकता है और आपको जो करना चाहिए वह अच्छी तरह से करते रहें, और वास्तव में अपने प्रत्येक कदम को फल पदवी के मार्ग पर अच्छी तरह से बढाएं। इसे केवल एक साधारण परीक्षा न समझें। यह वास्तव में अतुलनीय रूप से भव्य है, क्योंकि आप फा का सत्यापन कर रहे हैं और क्योंकि आप इसे सबसे कठिन समय के दौरान कर रहे हैं। कुछ चीज़ें वैसी ही प्रतीत होती हैं जैसे साधारण लोग करते हैं। फिर भी वे उन चीजों को स्वार्थ के लिए और साधारण मानवीय उद्देश्यों के लिए करते हैं, जबकि आप उन्हें दाफा के लिए करते हैं—उद्देश्य अलग है। आप साधक हैं, और भविष्य में आप इन चीजों की भव्यता देखेंगे। उनमें पवित्रता है जिसे आप अभी जानते हैं और उनमें पवित्रता है जिसे आप नहीं जानते हैं। जिस तरह से वे साधारण मनुष्यों के बीच प्रकट होती हैं, उससे आप यह अनुभव नहीं कर सकते कि वे कितनी भव्य हैं, क्योंकि मैं आपको अभिमानी या आत्मसंतुष्ट अनुभव नहीं होने दे सकता। आपके गुरू के रूप में, मैं केवल आपसे और अधिक प्रयास करने और हर कदम अच्छी तरह से उठाने के लिए कह सकता हूँ। इस एक वर्ष के दौरान, आपके सत्य को स्पष्ट करने में, आपकी साधना की प्रक्रिया के दौरान, और आपके द्वारा फा की सुरक्षा की प्रक्रिया के दौरान, सभी प्रकार की परीक्षाएँ हुई हैं और आपने सभी प्रकार की कठिनाइयों का सामना किया है। अपनी सोच और निर्णयों पर विश्वास करते हुए, आपने इसे पूरा कर लिया है। गुरूजी ने यह सब व्यर्थ में नहीं किया है। गुरूजी ने आपके लिए जो कुछ भी किया वह उचित था! (देर तक तालियाँ) आप वास्तव में उल्लेखनीय हैं! (तालियाँ)

विशिष्ट मुद्दों के संबंध में, मुझे लगता है कि जब अवसर मिलेगा तो मैं उनके बारे में आपसे बात करने के लिए कुछ समय निकालूंगा। मैं हर फा सम्मेलन में सम्मिलित नहीं सकता हूँ। हर बार जब मैं बाहर आता हूं तो इसका एक कारण होता है, न कि ऐसे ही आपको कुछ बताने के लिए—विशेषकर वर्तमान परिस्थितियों में। इसलिए भविष्य में मैं आपसे विस्तार से बात करने के लिए कुछ समय निकालूंगा। आज मैं अधिक नहीं कहूंगा। मुझे आशा है कि हर कोई फा-सुधार करने और दुष्टता को उजागर करने में और भी बेहतर करेगा। यह आपकी साधना का भाग है।

मैं केवल इतना ही कहूंगा। धन्यवाद। (तालियाँ)




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