फालुन बुद्ध फा बौद्ध मार्ग की एक महान, उच्च-स्तरीय साधना-पद्धति है, जिसमें ब्रह्मांड की सर्वोच्च प्रकृति—सत्य, करुणा, सहनशीलता —के साथ आत्मसात होना साधना का आधार है। इसकी साधना इसी सर्वोच्च प्रकृति द्वारा निर्देशित होती है और उस फा पर आधारित है जिससे ब्रह्मांड का सृजन होता है। इसलिए हम जिसकी साधना करते हैं वह एक महान फा, या एक महान दाओ है।
फालुन बुद्ध फा के अभ्यास में मन को लक्षित किया जाता है, जिसमें व्यक्ति के नैतिकगुण (शिन-शिंग ) की साधना को ही गोंग.
बढ़ाने की कुंजी माना गया है। किसी व्यक्ति के गोंग की ऊँचाई उसके नैतिकगुण की ऊँचाई के अनुपात में होती है, और यह ब्रह्मांड का एक परम सत्य है। “नैतिकगुण” में सद्गुण (द ) (एक श्वेत प्रकार का पदार्थ) और कर्म (एक काले प्रकार का पदार्थ) का रूपांतरण; साधारण मानवीय इच्छाओं और मोहभावों का त्याग; और सबसे कठिन कष्टों को सहन करने की क्षमता सम्मिलित है। इसमें अनेक बातें सम्मिलित हैं जिन्हें व्यक्ति को अपना स्तर बढ़ाने के लिए साधना द्वारा विकसित करना होता है।
फालुन बुद्ध फा में शरीर की साधना भी सम्मिलित है, जो आध्यात्मिक फल पदवी के महान मार्ग—एक महान उच्च-स्तरीय बौद्ध अभ्यास—की व्यायाम क्रियाओं को करने से प्राप्त होती है। व्यायामों का एक उद्देश्य साधक की दिव्य क्षमताओं और शक्ति-यंत्रों को उसके शक्तिशाली गोंग बल (गोंग-ली ) के माध्यम से सुदृढ़ करना है, जिससे “फा साधक को परिष्कृत करता है” का उद्देश्य प्राप्त होता है। दूसरा उद्देश्य साधक के शरीर में अनेक जीवित तत्वों का विकास करना है। उन्नत अभ्यास में, अमर शिशु या बुद्ध-शरीर उत्पन्न होगा, और अनेक क्षमताएँ विकसित होंगी। ऐसी वस्तुओं के रूपांतरण और साधना के लिए व्यायाम आवश्यक हैं। व्यायाम हमारे दाफा में सामंजस्य और फल पदवी का भाग हैं। इसलिए दाफा मन और शरीर की साधना की एक सम्पूर्ण प्रणाली है।
इसलिए दाफा मन और शरीर की साधना की एक सम्पूर्ण प्रणाली है। इसे “आध्यात्मिक फल पदवी का महान मार्ग” भी कहा जाता है। दाफा में साधना और व्यायाम दोनों आवश्यक हैं, जिसमें साधना को व्यायामों से अधिक महत्व दिया जाता है। यदि कोई व्यक्ति केवल व्यायाम करता है और अपने नैतिकगुण की साधना नहीं करता, तो उसका गोंग नहीं बढ़ेगा। और, जो व्यक्ति केवल अपने नैतिकगुण की साधना करता है पर आध्यात्मिक फल पदवी के महान मार्ग के व्यायाम नहीं करता, उसे अपने गोंग बल की वृद्धि में बाधा होगी और उसका मूल शरीर (बन-ती ) अपरिवर्तित रहेगा।
ऐसे लोग हैं जिनका पूर्वनिर्धारित संबंध है, और ऐसे लोग भी हैं जो अनेक वर्षों से साधना कर रहे हैं पर अपना गोंग बढ़ाने में असमर्थ रहे हैं। उनमें से अधिक लोग फा प्राप्त कर पाएँ, आरंभ से ही उच्च स्तर पर साधना कर पाएँ, और अपना गोंग तीव्रता से बढ़ाकर सीधे फल पदवी तक पहुँच पाएँ, मैंने इस महान मार्ग (दा-फा ) को, जिसका मैंने सुदूर अतीत में बुद्धत्व की साधना करके ज्ञानप्राप्ति पायी थी, आज जनसाधारण को प्रदान किया है। यह साधना मार्ग व्यक्ति को सामंजस्य और प्रज्ञा तक ले जाता है। क्रियाएँ संक्षिप्त हैं, क्योंकि महान मार्ग अत्यंत सरल और सुगम होता है।
फा चक्र (फा-लुन ) फालुन बुद्ध फा की साधना का मुख्य केंद्र है। फा चक्र उच्च-शक्ति पदार्थ से बना एक प्रज्ञावान, आवर्तन करता हुआ तत्व है। जो फा चक्र मैं साधक के निचले उदर में स्थापित करता हूँ, वह दिन के चौबीसों घंटे निरंतर घूमता रहता है। (सच्चे साधक मेरी पुस्तकें पढ़कर, मेरे व्याख्यानों के वीडियो देखकर, मेरे व्याख्यानों के ऑडियो सुनकर, या दाफा शिष्यों के साथ अध्ययन करके फा चक्र प्राप्त कर सकते हैं।) फा चक्र साधकों को स्वचालित रूप से साधना करने में सहायता करता है। अर्थात, फा चक्र से हर समय साधकों की साधना होती रहती है, चाहे वे हर पल व्यायाम न भी करें। आज संसार में प्रस्तुत सभी साधना मार्गों में से, यह एकमात्र है जिसने “फा व्यक्ति को परिष्कृत करता है” प्राप्त किया है।
आवर्तन करते हुए फा चक्र की प्रकृति ब्रह्मांड के समान है और यह उसका लघु रूप है। बौद्ध फा चक्र, दाओवादी यिन-यांग , और दस-दिशाओं
वाले विश्व की प्रत्येक वस्तु फा चक्र में उपस्थित होती है। जब फा चक्र भीतर की ओर (घड़ी की दिशा में) आवर्तन करता है, तब वह साधक को मुक्ति प्रदान करता है, क्योंकि वह ब्रह्मांड से बड़ी मात्रा में शक्ति ग्रहण कर उसे गोंग में रूपांतरित करता है। जब फा चक्र बाहर की ओर (घड़ी की विपरीत दिशा में) आवर्तन करता है, तब वह दूसरों को मुक्ति प्रदान करता है, क्योंकि वह ऐसी शक्ति उत्सर्जित करता है जो किसी भी प्राणी को बचा सकती है और किसी भी असामान्य अवस्था को सुधार सकती है; साधक के निकट उपस्थित लोग लाभान्वित होते हैं।
फालुन दाफा साधकों को ब्रह्मांड की सर्वोच्च प्रकृति—सत्य, करुणा, सहनशीलता—के साथ आत्मसात होने में सक्षम बनाता है। यह मूल रूप से अन्य सभी अभ्यासों से भिन्न है और इसकी आठ प्रमुख विशिष्ट विशेषताएँ हैं।
1. फा चक्र की साधना की जाती है, न की ऊर्जा-अमृत की।
फा चक्र की प्रकृति ब्रह्मांड के समान है और वह उच्च-शक्ति पदार्थ से बना एक प्रज्ञावान, आवर्तन करता हुआ तत्व है। फा चक्र साधक के निचले उदर में निरंतर आवर्तन करता रहता है और ब्रह्मांड से निरंतर शक्ति एकत्रित करता है, विकसित करके उसे गोंग में परिवर्तित करता है। इसी कारण फालुन दाफा में साधना करने से गोंग बढ़ सकता है और व्यक्ति को असाधारण रूप से शीघ्र गोंग खुलने की अवस्था तक पहुँचा सकता है। यहाँ तक कि वे लोग भी, जिन्होंने एक हजार वर्ष से अधिक साधना की है, यह फा चक्र प्राप्त करना चाहते थे पर नहीं कर सके। वर्तमान में, समाज में सभी लोकप्रिय अभ्यास अमृत ( दान ) की साधना करते हैं और अमृत बनाते हैं। उन्हें अमृत-पद्धति चीगोंग
कहा जाता है। अमृत-पद्धति चीगोंग के साधकों के लिए इस जीवनकाल में गोंग खुलना और ज्ञानप्राप्ति प्राप्त करना अत्यंत कठिन है।
2. जब व्यक्ति व्यायाम नहीं कर रहा होता, तब भी फा चक्र व्यक्ति को परिष्कृत करता है।
साधकों को प्रतिदिन कार्य करना, अध्ययन करना, भोजन करना और सोना होता है, इसलिए वे चौबीसों घंटे व्यायाम नहीं कर सकते। परंतु फा चक्र निरंतर आवर्तन करता रहता है और साधकों को चौबीसों घंटे व्यायाम करने जैसा प्रभाव प्राप्त करने में सहायता करता है। इसलिए यद्यपि व्यक्ति प्रत्येक क्षण व्यायाम नहीं कर सकता, फिर भी फा चक्र उसे बिना रुके परिष्कृत करता रहता है। संक्षेप में, भले ही व्यक्ति व्यायाम न कर रहा हो, फा उसे परिष्कृत कर रहा होता है।
आज संसार में कहीं भी सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत किसी अन्य अभ्यास ने कार्य और व्यायाम दोनों के लिए समय निकालने की समस्या का समाधान नहीं किया है। केवल फालुन दाफा ने इस समस्या का समाधान किया है। फालुन दाफा ही वह एकमात्र साधना मार्ग है जिसने “फा व्यक्ति को परिष्कृत करता है” प्राप्त किया है।
3. मुख्य चेतना की साधना, जिससे आपको गोंग प्राप्त हो।
फालुन दाफा व्यक्ति की मुख्य चेतना की साधना करता है। साधकों को सचेत रूप से अपने मन की साधना करनी होती है, अपने सभी मोहभावों को त्यागना होता है, और अपने नैतिकगुण को सुधारना होता है। आध्यात्मिक फल पदवी के महान मार्ग का अभ्यास करते समय आप समाधि जैसी अवस्था में नहीं रह सकते या स्वयं अचेत नहीं रह सकते। व्यायाम करते समय आपकी मुख्य चेतना को हर समय आपका संचालन करना चाहिए। इस प्रकार साधना से विकसित गोंग आपके अपने शरीर पर बढ़ेगा और आप ऐसा गोंग प्राप्त करेंगे जिसे आप स्वयं अपने साथ ले जा सकते हैं। इसी कारण फालुन दाफा इतना मूल्यवान है—आप स्वयं गोंग प्राप्त करते हैं।
हजारों वर्षों से, साधारण लोगों के बीच प्रस्तुत अन्य सभी अभ्यासों ने साधक की सहायक चेतना को परिष्कृत किया है; व्यक्ति का मांस-शरीर और मुख्य चेतना केवल माध्यम के रूप में रहे हैं। फल पदवी प्राप्त होने पर, साधक की सहायक चेतना ऊपर उठती है और गोंग को अपने साथ ले जाती है। तब व्यक्ति की मुख्य चेतना और मूल-शरीर के लिए कुछ भी शेष नहीं रहता—जीवनभर का साधना-प्रयास व्यर्थ हो जाता है। निश्चित ही, जब व्यक्ति अपनी मुख्य चेतना की साधना करता है, तो उसकी सहायक चेतना को भी कुछ गोंग मिलता है और, स्वाभाविक रूप से, वह मुख्य चेतना के साथ सुधार करती है।
4. मन और शरीर दोनों की साधना।
फालुन दाफा में “मन की साधना” से आशय व्यक्ति के नैतिकगुण की साधना से है। नैतिकगुण की साधना को प्रधानता दी जाती है, क्योंकि इसे गोंग बढ़ाने की कुंजी माना जाता है। दूसरे शब्दों में, आपका स्तर निर्धारित करने वाला गोंग व्यायाम करने से नहीं, बल्कि आपके नैतिकगुण की साधना करने से प्राप्त होता है। आपका गोंग स्तर आपके नैतिकगुण स्तर जितना ही ऊँचा होता है। फालुन दाफा में नैतिकगुण का तत्व सद्गुण से कहीं अधिक व्यापक क्षेत्र को समावेश करता है; यह सद्गुण सहित अनेक प्रकार की चीजों को सम्मिलित करता है।
फालुन दाफा में “शरीर की साधना” का अर्थ दीर्घायु प्राप्त करने से है। व्यायामों को करने से व्यक्ति का मूल शरीर रूपांतरित होता है और सुरक्षित रहता है। आपकी मुख्य चेतना और मांस-शरीर एक हो जाते हैं, जिससे संपूर्णता की प्राप्ति होती है। शरीर की साधना मानव शरीर के आणविक घटकों को मूल रूप से परिवर्तित कर देती है। कोशिकाओं के तत्वों को उच्च-शक्ति पदार्थ से प्रतिस्थापित कर, मानव शरीर अन्य आयामों के पदार्थ से बने शरीर में परिवर्तित हो जाता है। परिणामस्वरूप आप सदा युवा बने रहेंगे। समस्या को उसके मूल से हल किया जाता है। फालुन दाफा ऐसा अभ्यास है जो वास्तव में मन और शरीर दोनों की साधना करता है।
5. पाँच व्यायाम जो सुगम और सीखने में सरल हैं।
महान मार्ग अत्यंत सरल और सुगम होता है। व्यापक रूप से देखें तो फालुन दाफा में व्यायाम क्रियाओं की संख्या कम है, फिर भी जिन वस्तुओं का विकास होना है वे अनेक और व्यापक हैं। क्रियाएँ शरीर के प्रत्येक पक्ष और विकसित होने वाली अनेक वस्तुओं का संचालन करती हैं। सभी पाँच व्यायाम पूर्ण रूप से साधकों को सिखाए जाते हैं। आरंभ से ही साधक के शरीर में जहाँ शक्ति अवरुद्ध है, वे क्षेत्र खुलेंगे और ब्रह्मांड से बहुत अधिक शक्ति ग्रहण की जाएगी। बहुत अल्प समय में व्यायाम व्यक्ति के शरीर से अनुपयोगी पदार्थों को बाहर निकालेंगे और उसे शुद्ध करेंगे। व्यायाम साधकों को अपना स्तर बढ़ाने, अपनी दिव्य शक्तियों को सुदृढ़ करने और शुद्ध-श्वेत शरीर की अवस्था तक पहुँचने में भी सहायता करते हैं। ये पाँच व्यायाम साधारण व्यायामों से कहीं अधिक श्रेष्ठ हैं, जो शक्ति नाड़ियों
या महान और लघु ब्रह्मांडीय परिधियाँ खोलते हैं। फालुन दाफा साधकों को सबसे सुविधाजनक और प्रभावी साधना मार्ग प्रदान करता है, और यह सर्वोत्तम तथा सबसे मूल्यवान मार्ग भी है।
6. विचार से निर्देशित नहीं, भटकाव नहीं, और गोंग में तीव्र वृद्धि।
फालुन दाफा की साधना में विचार से निर्देशित करना, विचार को विशेष वस्तुओं पर केंद्रित करना, और मन की इच्छा द्वारा मार्गदर्शन करना नहीं होता है। इसलिए फालुन दाफा का अभ्यास पूर्णतः सुरक्षित है, और यह सुनिश्चित है कि साधक भटकेंगे नहीं। फा चक्र साधकों को अभ्यास में भटकने से और साथ ही उन लोगों के विघ्न से बचाता है जिनका नैतिकगुण निम्न है। इसके अतिरिक्त, फा चक्र किसी भी असामान्य अवस्था को अपने आप सुधार सकता है।
साधक अपनी साधना अत्यंत उच्च स्तर से आरंभ करते हैं। जब तक वे सबसे कठिन कष्टों को सहन कर सकते हैं, असहनीय को सह सकते हैं, अपना नैतिकगुण बनाए रख सकते हैं, और वास्तव में केवल एक साधना मार्ग का अभ्यास करते हैं, वे कुछ ही वर्षों में सिर के ऊपर तीन पुष्प एकत्रित होने की अवस्था तक पहुँच सकते हैं। यह त्रि-लोक-फा साधना के दौरान व्यक्ति द्वारा प्राप्त किया जा सकने वाला सर्वोच्च स्तर है।
7. व्यायाम करते समय स्थान, समय या दिशा की चिंता नहीं, और व्यायाम समाप्त करने की चिंता भी नहीं।
फा चक्र ब्रह्मांड का लघु रूप है। ब्रह्मांड घूम रहा है, उसकी सभी आकाशगंगाएँ घूम रही हैं, और पृथ्वी भी घूम रही है, इसलिए हमारे लिए उत्तर, दक्षिण, पूर्व या पश्चिम नहीं है। फालुन दाफा साधक ब्रह्मांड की मूल प्रकृति और उसके विकास के फा के अनुसार साधना करते हैं। इसलिए कोई व्यक्ति चाहे किसी भी दिशा की ओर मुख करे, वह प्रत्येक दिशा की ओर व्यायाम कर रहा होता है। क्योंकि फा चक्र निरंतर आवर्तन करता रहता है, समय की कोई अवधारणा नहीं होती है; साधक उन्हें किसी भी समय कर सकते हैं। फा चक्र सदैव आवर्तन करता रहता है और साधक उसका आवर्तन रोक नहीं सकते, इसलिए अभ्यास समाप्त करने की कोई अवधारणा नहीं है। आप क्रियाएँ समाप्त करते हैं, पर गोंग के कार्य को नहीं।
8. मेरे फा शरीरों द्वारा सुरक्षा होते हुए दुष्ट बाहरी तत्वों के हस्तक्षेप से भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है।
साधारण व्यक्ति के लिए अचानक उच्च-स्तरीय वस्तुएँ प्राप्त करना बहुत असुरक्षित होता है, क्योंकि उसका जीवन तुरंत संकट में पड़ जाएगा। जब साधक मेरी फालुन दाफा शिक्षाओं को स्वीकार करते हैं और वास्तव में साधना करते हैं, तब वे मेरे फा-शरीरों (फा-शन ) से सुरक्षा प्राप्त करेंगे। जब तक आप साधना में दृढ़ बने रहेंगे, मेरे फा-शरीर फल पदवी प्राप्त होने तक आपकी रक्षा करेंगे। यदि आप किसी समय साधना छोड़ देने का निर्णय लेते हैं, तो मेरे फा-शरीर चले जाएँगे।
अनेक लोग उच्च-स्तरीय सत्य सिखाने का साहस इसलिए नहीं करते क्योंकि वे उत्तरदायित्व संभालने में समर्थ नहीं होते हैं, और दिव्यलोक उन्हें ऐसा करने से रोकता है। फालुन दाफा एक पवित्र फा है। यदि साधक अपनी साधना में अपना नैतिकगुण बनाए रखता है, अपने मोहभावों को त्यागता है, और दाफा द्वारा निर्धारित किसी भी अनुचित इच्छाभाव को छोड़ देता है, तो एक उचित विचार सौ दुष्टताओं को वश में कर लेगा। कोई भी दुष्ट तत्व भयभीत हो जाएगा, और जो कुछ आपके सुधार से संबंधित नहीं है वह आपके साथ हस्तक्षेप या विघ्न करने का साहस नहीं करेगा। इस प्रकार फालुन दाफा की शिक्षाएँ पारंपरिक साधना विधियों या अन्य अभ्यासों और साधनाओं के अमृत-साधना सिद्धांतों से पूरी तरह भिन्न हैं।
फालुन दाफा में त्रि-लोक-फा और पर-त्रि-लोक-फा की साधना दोनों अनेक स्तरों से बनी है। यह अभ्यास आरंभ से ही अत्यंत उच्च स्तर पर आरम्भ होता है। फालुन दाफा अपने साधकों के लिए, और उन लोगों के लिए भी जो लंबे समय से साधना कर रहे हैं लेकिन अपना गोंग बढ़ाने में असफल रहे हैं, सबसे सुविधाजनक साधना मार्ग प्रदान करता है। जब साधक का गोंग बल और नैतिकगुण एक निश्चित स्तर तक पहुँचते हैं, तो वह सांसारिक जगत में रहते हुए अविनाशी, कभी न क्षीण होने वाला शरीर प्राप्त कर सकता है। गोंग का खुलना, ज्ञानप्राप्ति, और व्यक्ति का संपूर्ण अस्तित्व उच्च स्तरों तक आरोहण भी प्राप्त कर सकता है। बहुत अधिक दृढ़-संकल्प वाले लोगों को इस पवित्र फा का अध्ययन करना चाहिए, उचित ज्ञानप्राप्ति को प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए, अपना नैतिकगुण सुधारना चाहिए, और अपने मोहभावों को त्यागना चाहिए। केवल तभी वे फल पदवी प्राप्त कर सकते हैं।
(“ची-गोंग”) मानव शरीर की साधना करने वाले कुछ अभ्यासों का एक सामान्य नाम। हाल के दशकों में चीन में चीगोंग अभ्यास अत्यंत लोकप्रिय रहे हैं।