ली होंगज़ी
24 जुलाई, 2010 ~ वाशिंगटन, डी सी
(शिष्य खड़े होकर दीर्घकाल तक तालियाँ बजाते हैं)
आपने सचमुच कड़ा परिश्रम किया है! (शिष्य उत्साहपूर्वक तालियाँ बजाते हैं, और कहते हैं, "गुरुजी ने कड़ा परिश्रम किया है!") दाफा शिष्यों से जो विभिन्न परियोजनाओं में अपने उद्देश्य को पूरा कर रहे हैं, और अपने-अपने परिवेश और सामाजिक समूहों में अपनी प्रतिज्ञाओं को पूरा कर रहे हैं, मैं आपसे कहता हूं: आप सभी ने बहुत परिश्रम किया है! (शिष्य उत्साहपूर्वक तालियाँ बजाते हैं)
वर्तमान में, ऐसा लगता है कि आपने फा का सुधार करने और चेतन प्राणियों को बचाने में गुरु की सहायता करने के बारे में जो कहा था, या प्रतिज्ञा की थी, वह वास्तव में सच हो गई है और आपने सत्य के स्पष्टीकरण करने में अपनी भूमिका निभाई है। मैंने इसकी सफलता देखी है, साथ ही वह सब भी देखा है जो आपने अपने उद्देश्य को पूरा करने के लिए किया है। यह बिल्कुल असाधारण है। [आपने जो किया है] वह केवल उस समय उत्साहित होकर नहीं किया था, न ही यह केवल खोखली बातों तक सीमित था। अब आप उसे पूरा करने और सफल करने की अंतिम प्रक्रिया में हैं जिसे करने की आपने बहुत पहले प्रतिज्ञा की थी, और इसी कारण मैं कहता हूं कि दाफा शिष्य असाधारण हैं। चाहे इसे कोई कैसे भी समझे, आपने सबसे दुष्ट दमन को पार कर लिया है। आप सब देख चुके हैं कि दुष्टता चाहे जितनी देर तक टिकी रहे और चाहे जितने हथकंडे अपनाए, उससे कुछ होने वाला नहीं है। एक बात है जिस पर आप सभी बिल्कुल स्पष्ट हैं: इतिहास आज तक, यहां इस संसार में, यहाँ तक पहुँचने में सक्षम हुआ है, यह इसलिए क्योंकि यह दाफा शिष्यों द्वारा चेतन प्राणियों को बचाने के लिए आरक्षित था, क्योंकि इतिहास का यह अध्याय स्पष्ट रूप से दाफा शिष्यों की सफलता के लिए अस्तित्व में है और जिससे आप अपनी प्रतिज्ञा पूरी कर सकें। निःसंदेह, यह केवल आपके संकल्पों और प्रतिज्ञाओं को पूरा करने के बारे में नहीं है। यह फा-सुधार और इस ब्रह्मांड के अथाह जीवों के भाग्य से भी जुड़ा हुआ है—कुछ इतना विशाल। यदि आपको जो करना चाहिए वह आप अच्छी तरह कर लेते हैं, तो तीन लोकों में सबकुछ ठीक हो जाएगा और फा के सुधार की प्रक्रिया में गुरु को जो हस्तक्षेप का सामना करना पड़ेगा वह कम होगा।
कार्यों को करने में, चाहे आपको कितनी भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा हो, आपको किसी भी चीज का सामना करना पड़ा हो, या सबके साथ काम करते समय मानवीय मोहभावों से कोई भी हस्तक्षेप हुआ हो, फिर भी आपने इसे पूरा किया है। मुझे आशा है कि अब, इस प्रक्रिया के अंत में, दाफा शिष्य अधिक लोगों को बचाने और, और भी बेहतर करने का पूरा प्रयास करेंगे, जिससे उनका शक्तिशाली सद्गुण और भी बढ़ जाए। आपको हार नहीं माननी चाहिए और आपको इसमें और भी बेहतर प्रदर्शन करना चाहिए। इतिहास की यह अवधि पूरी तरह से दाफा शिष्यों को प्रदान की गई है जिससे वे फा का मान्यकरण कर सकें। दूसरे शब्दों में, मानव जाति का मंच दाफा शिष्यों को प्रदान किया गया है। इस भ्रम में ना रहो कि इस संसार में सब कुछ साधारण रूप से चल रहा है, या कि प्रत्येक राष्ट्र और लोग साधारण रूप से काम कर रहे हैं और व्यवहार कर रहे हैं, क्योंकि यह सब वास्तव में दाफा के लिए अस्तित्व में है। चाहे मानवजाति के अंतिम दिनों के बारे में कितनी भी भविष्यवाणियाँ प्राचीन अतीत से विरासत में मिली हों; चाहे कितनी भी, दाफा द्वारा तीन लोकों के निर्माण के बाद से, लोग मानव जाति के अंत के बारे में जानने में सक्षम हो गए हैं, चाहे वह खुले या गुप्त रूप से, अधिक या कम सीमा तक; और चाहे कितने लोगों ने [समाज की] वास्तविकताओं के बीच कुछ विश्वदृष्टिकोण बनाए हैं, वास्तव में, सभी जीव मानव जाति से जुड़े अंतिम घटनाक्रम की प्रतीक्षा कर रहे हैं जो अब सामने आ रहा है। मैं देख रहा हूं कि सब कुछ अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है। बात केवल इतनी है कि बहुत से लोग इस वास्तविकता और इस चलने वाले प्रकटीकरण को स्वीकार करने से डरते हैं; कि अंतिम क्षण आने से पहले बचाई जाने वाली जीवों की संख्या उस मात्रा तक नहीं पहुंच पाई है जितनी होनी चाहिए; और दाफा शिष्यों का एक भाग अभी भी ऐसा है जो साथ नहीं चल पाया है। यही मुख्य कारण है कि इस उपक्रम का अंत अभी भी कार्यान्वित नहीं किया गया है।
तो दूसरे शब्दों में, आपको चेतन प्राणियों को बचाने में ढिलाई नहीं करनी चाहिए, और आपको बेहतर करने की आवश्यकता है, और अधिक लोगों को बचाने की आवश्यकता है, क्योंकि ऐसा करना अत्यधिक महत्वपूर्ण है और वास्तव में बहुत महत्वपूर्ण है। मैंने जो कुछ भी चर्चा की है, मानवजाति अभी उस पर विश्वास नहीं करती है, लेकिन, शीघ्र ही, मानवजाति धीरे-धीरे इस बात को समझ लेगी और सब कुछ धीरे-धीरे स्पष्ट हो जाएगा। निकट भविष्य में, इस संसार में लोगों को एहसास होगा कि दाफा शिष्य लोगों को बचा रहे हैं। यह कुछ ऐसा है जिसे आपको निश्चित रूप से बेहतर करना होगा और अधिक शक्ति के साथ करना होगा। इसीलिए यह आवश्यक है कि आप अच्छा सहयोग करें। यदि आप अच्छा सहयोग करने में विफल रहते हैं, तो दुष्टता वास्तव में आपकी कमजोरियों का लाभ उठाएगी और आपको बड़ी हानि उठानी पड़ेगी। हानि, अर्थात्, व्यक्तिगत साधना के साथ-साथ हमारी चेतन प्राणियों को बचाने की समूह परियोजनाओं के लिए भी।
जैसा कि आप जानते हैं, यदि आप अच्छा करने में विफल रहते हैं, तो जिन परियोजनाओं को शुरू करने के लिए आपने इतना परिश्रम किया है, वे दुष्टता द्वारा बर्बाद कर दी जाएंगी, जिससे आपके सभी प्रयास विफल हो जाएंगे। यदि आप अच्छा सहयोग नहीं करते हैं, तो आप दाफा शिष्यों को जो करना चाहिए उसे प्रभावी ढंग से नहीं कर पाएंगे। यहाँ अक्सर यही होता है। जब कुछ परियोजनाओं के लिए सभी को एक साथ मिलकर कार्य करने की आवश्यकता होती है, तो सबसे पहली चीज जो लोग करते हैं वह है बार-बार बहस करना, प्रत्येक व्यक्ति अपनी-अपनी राय पर अड़ा रहता है, और अंतिम परिणाम यह होता है कि चीजें अनसुलझी रह जाती हैं और, परिणामस्वरूप, दाफा शिष्य कई चीजें पूरी करने में सक्षम नहीं हो पाते हैं या यहां तक कि वह काम भी अच्छी तरह से नहीं कर पाते हैं। इसके अनेक कारण हैं। मैंने कहा है कि दाफा शिष्य असाधारण हैं, और वे भिन्न-भिन्न संसार के राजा हैं, तो निश्चित रूप से आपकी अपनी राय और बहुत सी क्षमताएं हैं। हालाँकि, यदि सहयोग की आवश्यकता होने पर हर व्यक्ति अपनी मर्जी से काम करेगा तो ऐसा नहीं चलेगा। जब आपको किसी कार्य को पूरा करने के लिए मिलकर काम करने की आवश्यकता होती है, तो सभी को उस पर मिलकर काम करना होता है। तो वास्तव में चीजों को कैसे संभाला जाना चाहिए? वास्तविकता यह है कि किसी भी व्यक्ति का दृष्टिकोण परिपूर्ण नहीं होता, न ही किसी एक व्यक्ति का विचार बिना किसी कमी के बढ़िया होता है। गंभीर बातों पर, जब कोई, कोई मुद्दा उठाता है या किसी समस्या को हल करने का प्रयास करता है, या सुधार के लिए सुझाव देता है, जब तक हमें लगता है कि उसका शुरुआती बिंदु उचित है, और जो कार्य करना है वह उचित है, हमें सक्रिय रूप से उसका समर्थन करना चाहिए।
फिर ऐसे लोग भी हैं जो कहते हैं कि बेहतर सहयोग के लिए वे भिन्न-भिन्न विचार व्यक्त करते हैं, और यदि उनकी राय स्वीकार नहीं की जाती है, तो उन्हें उस कार्य को करना कठिन लगता है। लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए। एक दाफा शिष्य के पवित्र विचार फा से उत्पन्न होते हैं, और आपकी साधना इस बात से संबंधित नहीं है कि एक मनुष्य के रूप में आपके विचार कितने अच्छे हैं या आपका दृष्टिकोण कितना बढ़िया है। बल्कि, आपकी साधना इस बारे में है कि क्या आप चुनौतियों का सामना करते हुए भी पवित्र विचार रख पाते हैं। यदि किसी व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत विचार या उसके दृष्टिकोण में कमी है, तो आप अपनी परियोजना के सदस्यों के साथ स्वयंसेवक द्वारा आयोजित तर्कसंगत चर्चा कर सकते हैं। लेकिन, जब आप जो दृष्टिकोण रखते हैं उस पर सहमति या स्वीकृति नहीं होती है, और फिर भी आपको लगता है कि यह स्पष्ट है कि चीजों को अधिक आदर्श रूप से करने के लिए आपका दृष्टिकोण आवश्यक है, तो आप नकारात्मक और निष्क्रिय होने लगते हैं। वास्तव में, हालांकि, एक दाफा शिष्य के रूप में, यदि ऐसे मामलों में आपके विचार पवित्र हैं, और आप जो सोच रहे हैं वह साधना के बारे में है, उत्तरदायी होने के बारे में है, और यह कुछ ऐसा है जिसे अच्छी तरह से किया जाना चाहिए, तो आपको जो कुछ भी कमी अनुभव होती है उसे चुपचाप स्वीकार कर लेना चाहिए और उसे अच्छी तरह से करना चाहिए। वास्तव में एक दाफा शिष्य को इसे इसी प्रकार संभालना चाहिए। यदि सभी दाफा शिष्य इस प्रकार से चीजों को संभालने में सफल हो सकते हैं, तो निश्चित ही वहां सब कुछ बहुत सुचारू रूप से होने लगेगा।
इसलिए कुछ लोग सोचते हैं, "लेकिन जब ऐसा होता है, तो क्या दूसरे व्यक्ति को सारा श्रेय नहीं मिल जाएगा? क्या सभी शक्तिशाली सद्गुण उसके नहीं हो जाएँगे?" नहीं, ऐसा नहीं है। आप तो जानते हैं, हम जो करते हैं वह मनुष्यों को दिखाने के लिए नहीं किया जाता है, न ही यह किसी परियोजना स्वयंसेवक या दाफा एसोसिएशन स्वयंसेवक को दिखाने के लिए होता है, है ना? यदि आप आशा कर रहे हैं कि यह गुरु है जो देखेंगे, और उनका मुख्य शरीर आपके सामने नहीं है, तो आप किसके देखने की आशा कर रहे हैं? आप इसे बहुत सारे देवताओं के सामने कर रहे हैं। गुरु के फा शरीर भी देख रहे हैं, और ब्रह्मांड के असंख्य चेतन प्राणियों ने आपके हर एक विचार और मानसिक गतिविधि पर अपनी दृष्टि गड़ा रखी हैं। तो, आप किसे दिखाने की आशा कर रहे हैं? फा का मान्यकरण करने के दौरान आप जो कई आश्चर्यजनक चीजें कर रहे हैं, वे सभी ब्रह्मांड के इतिहास के इस अध्याय में दर्ज की जा रही हैं, जिसमें एक भी शिष्य से संबंधित कुछ भी नहीं छोड़ा गया है। हालाँकि, यदि आपका ध्यान सतही, साधारण मानवीय चीजों पर है, तो आपको मोहभाव हैं और आप मानवीय सोच का उपयोग कर रहे हैं। ऐसी बातों को महत्व न दें। यदि आप जो कमी देखते हैं उसे चुपचाप पूरा करने में सक्षम हैं, जो आपको लगता ही कि करना चाहिए उसे चुपचाप अच्छी तरह से करते हैं, और जब आपको लगता है कि यह आदर्श रूप से नहीं किया गया है और आप चुपचाप कुछ सुधार कर लेते हैं, तो सभी देवता आपके लिए अत्यधिक प्रशंसा करेंगे और बोलेंगे कि यह व्यक्ति बिल्कुल असाधारण है। केवल इस प्रकार से किए गए कार्य करने को ही मान्यता दी जाएगी जैसे कि एक दाफा शिष्य को करना चाहिए। तो, यह एक बात हुई। दाफा शिष्यों के रूप में, जब भी सहयोग की आवश्यकता होती है और फिर भी बहस चलती रहती हैं, या लोग बिना किसी निर्णय लिए बहस करते रहते हैं, आपको चीजों को उसी प्रकार से करने की आवश्यकता है जिस प्रकार मैंने बतायी हैं। और ऐसा करने पर, दुष्टता के पास हस्तक्षेप करने का कोई मार्ग नहीं बचेगा।
मैं सहयोग के मुद्दे पर एक और बात कहना चाहता हूं जो मुख्य भूमि चीन के बाहर दाफा शिष्यों से संबंधित है। यह कुछ ऐसा है जिसे मैंने पहले नहीं बताया था, क्योंकि मैं चाहता था कि आप में सुधार हों और अनुसरण करने के लिए अपना स्वयं का मार्ग खोजें; चूंकि सभी दाफा शिष्य उच्च लोकों के राजा हैं, इसलिए प्रत्येक को खोजने और परखने के माध्यम से यह समझना होगा कि प्रत्येक को फा से क्या अपेक्षा है। इसलिए, जहां तक वर्तमान में जो स्थिति है, इसके लिए पर्याप्त समय दिया जा चुका है। आप पहले ही दस वर्ष का समय पार कर चुके हैं, इसलिए इस [आपके मुद्दे] के संबंध में, मैं कहूंगा कि हमें इसे समाप्त कर देना चाहिए। इसलिए, मैं आपको बताना चाहता हूं कि आज से, प्रत्येक परियोजना का मुख्य स्वयंसेवक—एक प्रमुख स्वयंसेवक—उस परियोजना का प्रतिनिधि होगा। यह प्रत्येक क्षेत्र के दाफा एसोसिएशन के मुख्य स्वयंसेवक के लिए भी लागू होता है। वही इसका प्रतिनिधि होगा। चाहे जो भी हो, स्वयंसेवक जो कुछ भी करता है, आपसे अपेक्षा करता है, या निर्णय लेता है—उसे बिना किसी वाद-विवाद के पूरा करें। (उत्साहपूर्ण तालियाँ) आज से ही।
इसे बिना किसी वाद-विवाद के निभाएं। समझे मैंने क्या कहा? कई बार, जब लोग किसी चीज पर लंबी बहस कर रहे होते हैं, तो स्वयंसेवक को उस पर अपना निर्णय बताना चाहिए, और फिर आपको वही करना चाहिए। इसके अतिरिक्त, कई चीजों में, वह आपसे परामर्श किए बिना ही कार्य कर सकता है, और आपको कार्य सौंप सकता है। और ऐसा क्यों है? पहले, कई अवसरों पर जब आपने बहस की तो मैंने इस पर अपने विचार व्यक्त नहीं किए, क्योंकि मैं जानबूझकर आपको अपनी सोच में सुधार लाने की और अपने मार्ग बनाने में सफल होने के अवसर देना चाहता था। लेकिन अब, पर्याप्त समय दिया जा चुका है, और जैसे आपको होना चाहिए, वैसे अब आप बन चुके हैं। तो अब उस स्थिति से छुटकारा पाने का समय आ गया है। एक मुख्य स्वयंसेवक गुरु और वैश्विक दाफा एसोसिएशन के प्रति उत्तरदायी होता है, और यदि कुछ समस्या सामने आती है, तो गुरु या दाफा एसोसिएशन उससे बात करेंगे। उसे केवल उन लोगों को उत्तर देना होगा जो उससे एक स्तर ऊपर हैं। हमारे शिष्यों को अपनी साधना की स्थिति में सुधार करने की आवश्यकता है, और आज के बाद से उन्हें स्वयंसेवक पर दृष्टि रखकर साधना करने की आवश्यकता नहीं है। अब से आपको इस बारे में एक शब्द भी नहीं कहना चाहिए कि स्वयंसेवक साधना कैसे करता है या लोगों का नेतृत्व करने में कितना सक्षम है, और आपको अब उसकी ओर ध्यान नहीं देना चाहिए। आपको स्वयं की साधना करने पर ध्यान देने की आवश्यकता है, और जो मैंने अभी कहा है उसके अनुसार साधना करनी चाहिए। अभी से आप सभी को यही करना होगा। स्वयं की साधना करनी शुरू करें।
इसलिए किसी परियोजना का मुख्य स्वयंसेवक—चाहे वह किसी भी परियोजना का नेतृत्व कर रहा हो —या विभिन्न क्षेत्रों के दाफा एसोसिएशन के स्वयंसेवक जो कुछ भी करते हैं, आपको बस उनका अनुसरण करना है और वैसा ही करना है। क्या वे ऐसी गलती करेंगे जो हमारे सिद्धांतों के विरुद्ध हो? वे नहीं करेंगे, वे निश्चित रूप से नहीं करेंगे। मुझे इस पर पूरा विश्वास है। मैं इसे बहुत स्पष्ट रूप से देख सकता हूं, क्योंकि दाफा शिष्य इतने वर्षों तक तपस्या से गुजरे हैं। उस प्रकार की समस्याएँ नहीं होंगी। यदि वास्तव में ऐसी समस्याएं उत्पन्न होतीं, तो दाफा एसोसिएशन को, चाहे वह जो भी हो, उसे प्रतिस्थापित करने में कोई परेशानी नहीं होगी। लेकिन लोगों को प्रतिस्थापित करने के बारे में न सोचें, क्योंकि यह बहुत संभव है कि लोगों को प्रतिस्थापित करना संभव न हो। (शिष्य हंसते हैं) दाफा शिष्यों के विभिन्न स्वयंसेवकों में सुधार करना कोई सरल काम नहीं है। इतने वर्षों से गुजरने के बाद, दाफा शिष्यों के पास काम करने के अपने अनूठे तरीके और पद्धतियां होंगी। आप साधक हैं, और इस संबंध में, आप पूरी तरह से साधारण लोगों के समकक्ष या उनके समान नहीं हैं। इन दस वर्षों में स्वयंसेवकों में सुधार हो गया है और, मैं कहूंगा, अब काफी परिपक्व हो गए हैं। अब जब मैंने आपकी इस समस्या का समाधान कर दिया है, तो स्वयंसेवक अच्छा प्रदर्शन करेंगे। ऐसा इसलिए है क्योंकि बाहरी हस्तक्षेप के आक्रमण अब कम हो गए हैं, और स्वयंसेवक दाफा की चीजों के बारे में व्यापक तरीके से सोच पाएंगे, अब उन्हें अपनी शक्ति का बड़ा भाग यह पता लगाने में खर्च नहीं करना पड़ेगा कि आपके साथ और आपसी संबंधों को कैसे बेहतर बनाया जाए। इसके स्थान पर, वे दाफा परियोजनाओं को सफल बनाने में अपनी शक्ति लगाएंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि जो काम दाफा शिष्यों को करना चाहिए वह अच्छी तरह से हो। उनका बोझ कम हो जाएगा और उन्हें जो करने चाहिए उस कर्तव्य को निभाने के लिए अधिक समय मिलेगा। जहां तक आपकी बात है, जो दाफा के शिष्य हैं, आपको स्वयंसेवकों पर ध्यान केंद्रित नहीं करना चाहिए, बल्कि इसके स्थान पर, पूरी तरह से स्वयं पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और इस बात पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए कि कैसे अच्छा सहयोग करें, चीजों को अच्छी तरह से करें और जो आपको करना चाहिए उसे पूरा करें। आज से ऐसा ही होना चाहिए। मैंने यहां इस सम्मेलन में आपको औपचारिक रूप से यह समझाया है, और विशेष रूप से इसी मुद्दे पर बात करने के लिए मैं आज यहां आया हूं।
इसलिए, आज से ही आपको अपने तरीके बदलने होंगे और जैसा मैंने बताया है वैसा ही करना होगा। और ऐसा करके, हम क्या आशा कर सकते हैं? कई मामलों में निर्णय तेजी से हो जाएंगे, जब आप कार्यों को करेंगे तो उनमें बहुत शक्ति होगी और लिया गया कार्य तुरंत पूरा हो जाएगा। यह दृष्टिकोण उन सभी कार्यों के लिए लाभदायक होगा जो हम चेतन प्राणियों को बचाने के लिए करते हैं, और लोगों को बचाने के लिए हमारी प्रत्येक परियोजना में संचालन की गुणवत्ता और प्रगति के साथ-साथ फा का मान्यकरण करने के लिए हम जो कई चीजें करते हैं उनमें बड़े बदलाव देखे जाएंगे। तो अब से, हम उन चीजों को इसी प्रकार संभालेंगे जिनके विषय में मैंने अभी बात की है।
चूंकि आज यहां बहुत सारे दाफा शिष्य हैं, इसलिए संभवत: दो घंटे पर्याप्त नहीं होंगे यदि हम आपको प्रश्न पर्चियां देने के लिए कहें जैसा कि हम साधारणतः फा सम्मेलनों में करते हैं। इसलिए, मुझे लगता है कि यदि बाद में आपकी व्यक्तिगत परियोजना बैठकें होती हैं, तो मैं आ सकता हूं और उस संदर्भ में बोल सकता हूं, और इस प्रकार, हम आपके विशिष्ट मुद्दों को लक्षित कर सकते हैं और उनका समाधान कर सकते हैं। यदि मैंने अभी जो चर्चा की उस पर आपको आपत्ति है तो आप विभिन्न माध्यमों से अपने विचार व्यक्त कर सकते हैं। लेकिन, मैं जो सोच रहा हूं वह यह है कि, आप सभी यहां "फा का सुधार करने में गुरु की सहायता करने" के लिए आए हैं—जैसा कि आप कहते हैं—तो मैं पूछूँगा, क्या आप वास्तव में गुरु को फा के सुधार करने में सहायता करना चाहते हैं? आप कहते हैं, "जो भी गुरु कहेंगे, वही हम करेंगे," और, "जो भी गुरु चाहेंगे, वही हम करेंगे।" तब मैं आपसे कहूँगा: यही तो मैं चाहता हूँ! (उत्साहपूर्ण तालियाँ)
इसके बाद, मैं कुछ और भी कहना चाहूँगा। अर्थात्, मैं इस बारे में बात करूंगा, "गुरु जो भी चाहेंगे, हम वही करेंगे।" सच कहा जाए तो, कभी-कभी आपके होंठ कहते होंगे कि गुरु जो भी चाहेंगे, आप वही करेंगे, लेकिन, जैसे ही आप वास्तविक जीवन की परिस्थितियों का सामना करते हैं, [आपने जो कहा] उसका आपके जाने बिना ही प्रभाव कम हो जाता है। चीजों पर आपकी हमेशा अपनी राय होती है, और सोचते हैं कि आपकी राय आपकी वास्तविकताओं और परिस्थितियों से मेल खाती है। लेकिन यह सच नहीं है। आपको यह नहीं भूलना चाहिए: इतिहास की यह वर्तमान अवधि फा-सुधार के लिए निर्धारित की गई थी, और चेतन प्राणियों को बचाने और स्वयं को परिपूर्ण करने के लिए दाफा शिष्यों को दी गई है। मानवीय सोच के साथ यह उतना सरल नहीं होता है जितना लोग इसकी कल्पना करते हैं। दूसरी बात यह है कि, कुछ लोग हमेशा सोचते हैं, "गुरु जो भी चाहते हैं, हम वही करेंगे, लेकिन चलो इससे थोड़ा बेहतर करते हैं," और फिर यह गुरु जो चाहते हैं उसे बदलने की बात हो जाती है। जब भी ऐसा होता है तो यह मानवीय मोहभाव के कारण होता है, और यह हस्तक्षेप के रूप में कार्य करता है।
शेन यून टिकट बिक्री का विषय भी है। मैंने कहा है कि हमें अब उच्च-स्तरीय समाज पर ध्यान केंद्रित करना है, और केवल स्वयं को सांस्कृतिक मुख्यधारा का भाग बनाकर ही हम बड़े प्रमाण पर समाज में प्रवेश कर सकते हैं, अधिक प्रभाव डाल सकते हैं, अधिक लोगों को सम्मिलित कर सकते हैं, और अधिक चेतन प्राणियों को बचा सकते हैं। लेकिन फिर भी कुछ लोग ऐसे हैं जो भिन्न-भिन्न प्रकार की आपत्तियां उठा रहे हैं, जैसे कि कुछ लोगों का कहना है कि टिकट के मूल्य बहुत अधिक हैं। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है। उदाहरण के लिए, शेन यून की एक कंपनी वर्तमान में अमेरिका के पश्चिमी तट पर प्रदर्शन कर रही है, और टिकट के मूल्य उच्च-स्तरीय टिकटों के सामान्य मूल्यों के आधार पर काफी हद तक निर्धारित किए गए थे। जब लोगों ने पहली बार टिकट बेचना शुरू किया, तो उन्हें खरीदने वाले बहुत कम लोग थे। इसके कई कारण थे, जिनमें से एक यह है कि जुलाई और अगस्त में बहुत से लोग छुट्टियां मना रहे होते हैं, छात्र छुट्टियों पर होते हैं, और कई संपन्न परिवार समुद्र तट पर होते हैं, कुछ नौकायन कर रहे होते हैं, जबकि अन्य कहीं समारोहों में या मित्रों से मिलने जाते हैं। तो जो भी हो, वे अन्य चीजों में व्यस्त हैं और इसलिए बहुत से लोग अभी भी वहाँ नहीं हैं। और इसका अर्थ यह है कि शो देखने के लिए कम लोग आते हैं। यही समस्या का मूल कारण है। यदि आप अभी हमारी टिकटों को सस्ता कर देते हैं, तो भी इसमें आने वाले अधिक लोग नहीं होंगे। यही इसका मूल कारण है।
कुछ ऐसा है जिस पर आपको स्पष्ट होने की आवश्यकता है। जब मैं कुछ करना चाहता हूं, तो यह बिल्कुल ऐसी बात नहीं है कि आप उसके होने की संभावना पर बहस करें। यदि मैं इसे एक निश्चित तरीके से करने के लिए कहता हूं, तो आपको केवल इसे करने की चिंता करनी चाहिए। ऐसा इसलिए है क्योंकि एक बार जब मैं कुछ निर्णय ले लेता हूं, तो यह केवल कुछ शब्द बोलने का साधारण मामला नहीं होता है, न ही मैं जो तरीका अपनाता हूं वह किसी भी प्रकार से सरल होता है। मुझे कई चीजों को समायोजित करने की आवश्यकता है, और यहां तक कि दिव्य प्राणी भी मेरा अनुसरण कर रहे हैं। फा-सुधार में कई चीजें परिवर्तित होती रहती हैं, लेकिन यदि आप चीजों को स्वीकार करने में सक्षम नहीं होने के कारण उन्हें परिवर्तित करते रहते हैं, और आप हमेशा चीजों को परिवर्तित करना चाहते हैं, तो स्थिति तुरंत गड़बड़ा जाएगी। यहां तक कि थोड़े से परिवर्तन से भी गड़बड़ी हो जाएगी। क्या आप यह नहीं कहते कि आप कार्य वैसे ही करेंगे जैसे गुरु उन्हें करवाना चाहते हैं? (शिष्य हंसते हैं) तो फिर गुरु जो चाहते हैं उस पर आपको आपत्ति कैसे हो सकती है? यदि [गुरु की सोच] वास्तव में संभव नहीं थी, तो गुरु उत्तरदायित्व वहन करेंगे! यह आपके लिए संभव है या नहीं, बस प्रयास करके देखें। हालाँकि आप में से बहुत से लोग यहाँ पश्चिमी समाज में रह रहे होंगे, वास्तव में, आप सच में इस स्थान को नहीं समझते हैं। इसका अर्थ यह है कि, आपको उस सोच को बदलने की आवश्यकता है जो पार्टी संस्कृति ने आपके अंदर उत्पन्न की है, और बेहतर ढंग से समझें कि चीन के बाहर साधारण संसार में जीवन कैसे चलता है। मानवीय सोच को हमेशा चीजों में बाधा न बनने दें। जब आप वास्तव में गुरु की इच्छा के अनुसार चीजों को संभालने का प्रयास करते हैं, लेकिन इसे उचित तरीके से नहीं करते हैं, तब भी चीजें काम नहीं करेंगी। गुरु ने आपको अपने प्रयासों को उच्च-स्तरीय समाज पर केंद्रित करने के लिए कहा था, फिर भी आप उन स्थानों पर जा रहे हैं जो उच्च-स्तरीय नहीं हैं। तो स्वाभाविक रूप से, चीजें काम नहीं करेंगी। और वास्तव में, इसका अर्थ है कि आप सच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। यदि गुरु आपको उच्च-स्तरीय समाज पर काम करने के लिए कहते हैं, तो बस इसे पवित्र विचारों के साथ करें, और आप निश्चित रूप से सफल होंगे।
निःसंदेह, मैं अपनी बात समझाने के लिए केवल एक उदाहरण की सहायता ले रहा था। ऐसी कई चीजें हैं जिनके बारे में आप बहुत स्पष्ट नहीं हैं। स्पष्टता प्राप्त करने की प्रक्रिया बहुत लंबी नहीं खिंचनी चाहिए। यह कहना कि आप "कार्यों को गुरु जैसे करते हैं वैसे ही करेंगे" दिखावा करने जितना सरल नहीं है। अन्य परियोजनाओं के साथ [जो गुरु द्वारा निर्देशित नहीं हैं], आप चीजों के बारे में जो भी चुनते हैं वह आपकी अपनी इच्छा है, भले ही आप तर्क-वितर्क में उलझे हों या मतभेदों से निपट रहे हों। लेकिन जब उन चीजों की बात आती है जो गुरु करना चाहते हैं, तो आप वास्तव में इस बारे में बहस नहीं कर सकते कि यह संभव है या नहीं। इसे सर्वोत्तम तरीके से कैसे क्रियान्वित किया जाए, केवल इस पर बहस की जा सकती है। आपको वास्तव में इस पर स्पष्ट होना चाहिए।
फा सम्मेलन आयोजित हुए कुछ समय हो गया है, और बड़े प्रमाण पर कोई सम्मेलन नहीं हुआ है। इसका अर्थ है कि विभिन्न क्षेत्रों के हमारे शिष्यों को एक साथ आने के अधिक अवसर नहीं मिले हैं। मैंने सुना है कि आज प्रस्तुत अनुभव साझा करने की गुणवत्ता काफी अच्छी है, और सभी को लगता है कि फा सम्मेलन अच्छा चल रहा है। इसमें इससे भी अधिक कुछ है। यह सब इस तथ्य के कारण है कि दाफा के शिष्य सुधार के परिणामस्वरूप अधिक से अधिक परिपक्व हो गए हैं, और फा के सिद्धांतों के संदर्भ में कई चीजें अधिक से अधिक स्पष्ट होती जा रही हैं। इसलिए आपकी साधना की स्थिति विभिन्न तरीकों से इसे प्रतिबिंबित करेगी ही। दाफा शिष्यों की साधना की स्थिति भविष्य में तेजी से बेहतर होगी, साथ ही सभी [शिष्यों] की स्थिति भी बेहतर होगी। यह निश्चित है। यदि आप सभी मेरे द्वारा बताई गई अपेक्षा को समझ सकें और पूरा कर सकें, तो विभिन्न क्षेत्रों में दाफा शिष्यों की साधना स्थितियां भी इसी प्रकार परिवर्तित हो जाएंगी। इसलिए, आज से, आपको उन चीजों के बारे में व्यर्थ बहस करने या विरोध करने की आवश्यकता नहीं है जो आपके संबंधित क्षेत्रों के मुख्य स्वयंसेवक या मुख्य परियोजना स्वयंसेवक करना चाहते हैं। आपको बस वह करने की आवश्यकता है [जो वे निर्णय लेते हैं], क्योंकि गुरु के फा शरीर और अनेक देवता चीजों की देखभाल कर रहे हैं।
जब आप मुख्य स्वयंसेवक पर प्रश्न उठाते हैं, तो आप वास्तव में उस परियोजना पर ही प्रश्न उठा रहे होते हैं। ऐसा कैसे? आइए एक उदाहरण के रूप में एनटीडी का उपयोग करें। आप जानते हैं कि एनटीडी का मुख्य स्वयंसेवक कौन है। मान लीजिए कि लोग कहते हैं कि एनटीडी के मुख्य स्वयंसेवक में समस्याएँ हैं, आपको उसके बारे में संदेह है, या आप कहते हैं कि वह कितना अनुपयुक्त है, और फिर आप उसे बदल देते हैं। मैं आपको बता दूँ की, यदि ऐसा हुआ, तो एनटीडी ने अपनी स्थापना के समय से आज तक जो कुछ भी किया है वह सब नष्ट हो जाएगा, और उस परियोजना में सम्मिलित लोगों द्वारा फा का मान्यकरण करने और चेतन प्राणियों को बचाने के लिए किया गया सब कुछ व्यर्थ हो जाएगा। यह व्यर्थ चला जाएगा। परियोजना अस्तित्व में नहीं रहेगी, और आपके द्वारा स्थापित किए गए शक्तिशाली गुण या आपके द्वारा किए गए कार्यों में से कोई भी गिना नहीं जाएगा। यह बहुत गंभीर बात है। फिर आप सोचेंगे कि ऐसा कैसे हुआ कि मुख्य स्वयंसेवक इतनी बड़ी चीज की अध्यक्षता करने आया। क्या ऐसा इसलिए है क्योंकि उन्होंने विशेष रूप से अच्छी तरह से साधना की? आवश्यक नहीं। यह इस तथ्य के कारण है कि उन्होंने इस परियोजना को शुरू किया और इसका नेतृत्व किया, और परियोजना उन पर टिकी हुई है। बाकी हर कोई केवल फा का मान्यकरण कर रहा है और अपनी भूमिका निभा रहा है, उस परियोजना में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर रहा है जो पहले ही शुरू हो चुकी है। यह उस साधना के समान है जो आप साधारण समाज में किसी कंपनी में करते हैं: आपके बॉस को आपके कारण कोई शक्तिशाली सद्गुण नहीं मिलेगा, लेकिन आप उस वातावरण में अपना स्वयं का शक्तिशाली सद्गुण स्थापित कर लेंगे।
यह महत्वपूर्ण है कि किसी परियोजना का मुख्य स्वयंसेवक अच्छी तरह से साधना करे। यदि वह अच्छी तरह से साधना करने में विफल रहता है, तो इसका प्रभाव पूरी परियोजना पर पड़ेगा, जिससे यह रुक जाएगी और कई कठिनाइयां उत्पन्न होंगी। तो यह महत्वपूर्ण है। लेकिन जैसा कि कहा गया है, दाफा एसोसिएशन उसके लिए उत्तरदायी है, और यदि गुरु को कोई समस्या दिखाई देती है तो वह उनसे बात करेंगे। इसलिए आपको इसके बारे में चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। हालाँकि, किसी भी परियोजना के मुख्य स्वयंसेवक के लिए, जोखिम वास्तव में बहुत अधिक हैं। आपमें से शेष लोगों के लिए, आपको पिछले दस वर्षों में उस परियोजना पर अपनी पूर्ण साधना को पूरी तरह से निष्फल नहीं करना चाहिए, जैसे कि उस व्यक्ति को प्रतिस्थापित करना, और सब कुछ फिर से शुरू करना, क्योंकि अब हमारे पास उतना समय नहीं है जो एक बार हमारे पास था या वही अवसर नहीं हैं। आपको अपने शक्तिशाली सद्गुण—शक्तिशाली सद्गुण जो आपने स्थापित किए थे—या फा का मान्यकरण करने में आपकी जो उपलब्धियां थीं, या चेतन प्राणियों को बचाने के दौरान आपने जो कुछ भी किया था, उसे नष्ट नहीं करना चाहिए। इसलिए आपको किसी को बदलने या यदि स्वयंसेवक अयोग्य है तो आप क्या करेंगे जैसी बातों पर अधिक विचार नहीं करना चाहिए। यदि आपने वास्तव में उन विचारों पर कार्य किया होता, तो जिन चीजों पर इसका प्रभाव पड़ता, वे बहुत बड़ी होतीं, और शुरू से अंत तक आपने जो कुछ भी किया, वह सब व्यर्थ हो जाता। हालाँकि, यदि वह व्यक्ति जो मुख्य स्वयंसेवक है, ने वास्तव में बुरा काम किया है, और वास्तव में काम नहीं कर रहा है, तो गुरु के पास इसे संभालने के वैकल्पिक साधन हैं। यदि मुझे वास्तव में किसी को बदलना होता, तो मुझे कई देवताओं का समर्थन मिलता, और आपके शक्तिशाली सद्गुण को खोए बिना चीजें फिर से व्यवस्थित हो जातीं। लेकिन यह वे बदलाव नहीं हैं जो ऐसे ही किए जा सकें। मुख्य स्वयंसेवक को बिना सोचे-समझे बिल्कुल भी नहीं बदला जाना चाहिए। जब तक उसने कोई बड़ी गलती नहीं की है, या दूसरी ओर नहीं चला गया है, तब तक उसे बदला नहीं जा सकता।
आज मैं इस मुद्दे को सामने लेकर आया हूं। मैंने एनटीडी के उदाहरण का उपयोग किया, लेकिन यह केवल एक उदाहरण था। मैंने जो कहा वह अन्य सभी परियोजनाओं के लिए भी लागू होता है। हमेशा स्वयंसेवक को साधना कराने पर ध्यान न दें। आज से, आपको हमेशा स्वयंसेवक की गलती नहीं ढूंढनी चाहिए। यदि आप एक साधारण नौकरी में भी अपने बॉस से हमेशा अप्रसन्न रहते हैं, तो आपको कुछ ही समय में नौकरी से निकाल दिया जाएगा। इतने वर्षों के बाद भी मैंने स्वयंसेवक क्यों नहीं बदले? एक बात यह कि, मैं उनमें सुधार कर रहा हूँ। और दूसरी बात, वह उस परियोजना के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है। उस व्यक्ति को बदल देंगे तो परियोजना ही नहीं रहेगी। आप जो कुछ भी फिर से बनायेंगे वह बिल्कुल नया होगा, और दाफा के शिष्यों ने उस परियोजना पर पहले जो कुछ भी किया होगा वह मिटा दिया जाएगा, और कुछ नहीं बचेगा। यह इतना महत्वपूर्ण है। आपने जो कुछ किया है, उसे आपको संजोना चाहिए, क्योंकि यह स्वयं को संजोने के समान है! गुरु के शब्द ध्यान में रखें! (तालियाँ)
मैं इतना ही कहूंगा। आप सभी का धन्यवाद! (उत्साहपूर्ण तालियाँ) हमारे दाफा शिष्यों के लिए, आपमें से उन लोगों के लिए जो विभिन्न परियोजनाओं में स्वयंसेवक नहीं हैं, लेकिन उनके साथ काम करना होता है, आपको वास्तव में, आज से, एक साथ मिलकर अच्छी तरह से काम करने और फा-सुधार की प्रगति की आवश्यकताओं को पूरा करने की आवश्यकता है। मुझे आशा है कि आप सभी बेहतर करेंगे। आप सभी उल्लेखनीय हैं। आपने इसे सबसे कठिन और सबसे दुष्ट परिस्थितियों से पार किया है, और इसके अतिरिक्त, आप निरंतर फा का मान्यकरण करते रहे हैं, सत्य को स्पष्ट करते रहे हैं, और चेतन प्राणियों को बचाते रहे हैं—आजतक। आपको अपने शक्तिशाली सद्गुणों की सीमा का एहसास नहीं हो सकता है, लेकिन इस ब्रह्मांड के चेतन प्राणी पहले से ही आपको उस सम्मान के साथ देख रहे हैं जिसके आप अधिकारी हैं।
आप सभी का धन्यवाद! (शिष्य खड़े होकर दीर्घकाल तक तालियाँ बजाते हैं))
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